Tarun Tejpal Case: तहलका के पूर्व संपादक और यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराए गए तरुण तेजपाल ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ दायर अपील को लेकर अहम दलील दी। तेजपाल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि जिस बयान के आधार पर उन्हें दोषी ठहराया गया, वह मामले में पेश किए गए CCTV फुटेज से मेल नहीं खाता।
यह दलील तेजपाल की उस याचिका पर सुनवाई के दौरान दी गई, जिसमें उन्होंने अपील की सुनवाई होने तक आत्मसमर्पण से छूट देने की मांग की है। मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने की।
गोवा सरकार ने किया विरोध
गोवा सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तेजपाल की याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के नियमों के मुताबिक जेल की सजा पाए आरोपी को अपील दाखिल करने से पहले आत्मसमर्पण करना होता है। यदि आरोपी ने आत्मसमर्पण नहीं किया है तो उसे इससे छूट के लिए अदालत में आवेदन देना जरूरी है। मेहता ने यह भी दलील दी कि हाईकोर्ट द्वारा सजा पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट के नियमों की अनिवार्यता खत्म नहीं होती।
सिब्बल बोले- दो दिन के लिए सरेंडर का कोई मतलब नहीं
कपिल सिब्बल ने दलील दी कि तेजपाल सजा पर रोक की सुरक्षा को बढ़ाने की मांग नहीं कर रहे हैं। हाईकोर्ट पहले ही उनकी सजा पर रोक लगा चुका है और वह आदेश अभी प्रभावी है। उन्होंने कहा कि तेजपाल की याचिका नियमित आपराधिक अपील है और वह सिर्फ इसे 31 अगस्त को सूचीबद्ध कराने की मांग कर रहे हैं। सिब्बल के मुताबिक, जब आत्मसमर्पण की अंतिम तारीख 3 सितंबर है तो 31 अगस्त को अपील सूचीबद्ध होने की स्थिति में बीच के दो दिनों के लिए आत्मसमर्पण कराने का कोई उद्देश्य नहीं होगा। सुनवाई के अंत में न्यायमूर्ति आलोक अराधे ने फैसला सुरक्षित रखते हुए कहा कि अदालत आदेश पारित करेगी।
CCTV फुटेज को बनाया अपील का आधार
तेजपाल की सुप्रीम कोर्ट में दायर अपील में बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। उनकी मुख्य दलीलों में गोवा के उस होटल की लिफ्ट का CCTV फुटेज भी शामिल है, जहां 2013 में कथित घटना हुई थी। याचिका में दावा किया गया है कि CCTV फुटेज और होटल के सुरक्षा प्रबंधक की गवाही अभियोजन पक्ष के घटनाक्रम से मेल नहीं खाती। तेजपाल की ओर से यह भी कहा गया है कि लिफ्ट के दरवाजे किसी निर्धारित मंजिल पर पहुंचने के बाद अपने आप खुलते थे और कम से कम कुछ सेकंड तक खुले रहते थे।
अपील में CCTV में दिखाई देने वाली लिफ्ट की आवाजाही और अन्य घटनाक्रम का हवाला देते हुए हाईकोर्ट के निष्कर्षों पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा पीड़िता की घटना के बाद की गतिविधियों के संबंध में CCTV फुटेज, WhatsApp संदेश, ईमेल और अन्य गवाहों के बयानों का भी हवाला दिया गया है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनाई थी 10 साल की सजा
बॉम्बे हाईकोर्ट ने अगस्त में निचली अदालत के बरी करने के फैसले को पलटते हुए तेजपाल को कथित यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराया था। अदालत ने उन्हें 10 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी और चार सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया था। इसी के तहत तेजपाल को 3 सितंबर तक सरेंडर करना है। अब सुप्रीम कोर्ट यह तय करेगा कि तेजपाल की आपराधिक अपील को 31 अगस्त को आत्मसमर्पण से पहले सूचीबद्ध करने की अनुमति दी जाए या नहीं।
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