नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के सदस्य-सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी की कला और कलाकारी अब कला केंद्र की चारदीवारी को पार कर देशभर में चर्चा का विषय है। ऐसा नहीं है कि डॉ. जोशी की 'कलाकारी' सिर्फ इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ही पुष्पित-पल्लवित हुई। अपनी सरकारी सेवा में वे जिस-जिस संस्थान में रहे, हर जगह चर्चा के केंद्र में और विभागीय-प्रशासनिक जांच की जद में रहे। ऐसे में सवाल उठता है कि वे माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय, कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय में कारनामे करने के बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में कैसे आ गए?
अब यहीं से उनकी कलाकारी शुरू होती है। दागी होने के बावजूद वे एक से एक जिम्मेदारी वाले पद पर कैसे नियुक्त हो जाते हैं। पहली बात तो यह है कि डॉ. जोशी 'सेवा के बदले मेवा' लेने-देने की परंपरा के हैं और अपने को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का खास साबित कर ले जाते हैं। यही नहीं, बताने वाले तो यह भी बताते हैं कि मध्य प्रदेश में कांग्रेस शासन के दौरान वे अपने को प्रगतिशील कांग्रेसी भी साबित करते रहे हैं। फिलहाल उनकी कला इस समय इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में चर्चा में है।
ओमप्रकाश सिंह ने की मांग
पूर्वी उत्तर प्रदेश के गाजीपुर की जमानियां विधानसभा क्षेत्र के चर्चित विधायक ओमप्रकाश सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर डॉ. सच्चिदानंद जोशी को पदमुक्त करने की मांग की है। ओमप्रकाश सिंह ने डॉ. सच्चिदानंद जोशी पर आईजीएनसीए के क्षेत्रीय केंद्र वाराणसी में एक जाति विशेष की नियुक्ति करने और वाराणसी के राजघाट स्थित गांधी विद्या संस्थान पर कब्जा करने की कोशिश का आरोप लगाया है।विधायक ओमप्रकाश सिंह के पहले बिहार के बक्सर से राजद सांसद सुधाकर सिंह ने पीएम मोदी को पत्र लिखकर डॉ. सच्चिदानंद जोशी को पद से तत्काल हटाने की मांग की थी।
विधानक ने पत्र में लिखे 14 आरोप
विधायक ओमप्रकाश सिंह ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में डॉ. सच्चिदानंद जोशी पर 14 आरोप लगाए हैं। पीएम मोदी के साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री कार्यालय, उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्रीय संस्कृति मंत्री, गृह मंत्री, भारत सरकार, अध्यक्ष, पिछड़ा वर्ग आयोग, अध्यक्ष, अनुसूचित जाति आयोग और अध्यक्ष, अनुसूचित जनजाति आयोग, नई दिल्ली को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है।
आर्थिक अनियमितता का भी आरोप
ओमप्रकाश सिंह ने अपने पत्र में लिखा है कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए), संस्कृति मंत्रालय में भ्रष्टाचार के सिद्ध दोषी डॉ. सच्चिदानंद जोशी की नियुक्ति तथा क्षेत्रीय केंद्र वाराणसी में हुए कदाचार एवं आर्थिक अनियमितता, गांधी विद्या संस्थान, राजघाट, वाराणसी पर अवैध कब्जे और उसकी छवि को धूमिल करने के लिए डॉ. जोशी के विरुद्ध जांच किया जाए और उन्हें पदमुक्त किया जाए।
जमानियां के विधायक ओमप्रकाश सिंह ने डॉ. सच्चिदानंद जोशी पर निम्न आरोप लगाए हैं:
1. डॉ. सच्चिदानंद जोशी के कार्यकाल में बनारस में स्थित प्रतिष्ठित गांधी विद्या संस्थान को आईजीएनसीए द्वारा कब्जा किए जाने की भी कोशिश की गई और मीडिया सूत्रों से प्राप्त सूचना के अनुसार लाखों रुपये भी इस कवायद में फूंके गए हैं, जिसकी तुरंत जांच की जानी चाहिए। वर्ष 2023 में गांधी विद्या संस्थान को चलाने के लिए आईजीएनसीए को कहा गया था, जिसे लगभग पूरी तरह से खत्म करके डॉ. जोशी की सहमति से क्षेत्रीय निदेशक, वाराणसी डॉ. अभिजित दीक्षित द्वारा गांधी विद्या संस्थान के पुनर्निर्माण के नाम पर लाखों रुपये अनियमित रूप से खर्च कर दिए गए और बगैर कोई सार्थक काम किए कब्जा जमाए रखा गया था और इस संस्थान की गरिमा गिराई गई।
2. आईजीएनसीए के वाराणसी केंद्र में भी वर्ष 2024-25 के दौरान हुई भर्ती में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार किया गया है और कुल पांच पदों में से आरक्षण के रोस्टर नियम को अनदेखा कर कोऑर्डिनेटर के पद पर दो लोगों को नौकरी दी गई, जबकि इसके साक्षात्कार के लिए सिर्फ पांच उम्मीदवार बुलाए गए और उनमें से भी दो अपात्र थे और इनको भी डमी एप्लीकेंट के रूप में योजनाबद्ध रूप से शामिल किया गया। साथ ही, उपरोक्त समेत बाकी तीन पदों में भी जाति विशेष को योग्यता के विरुद्ध जातीय वरीयता दी गई एवं इस प्रकार पिछड़े और दलित वर्ग के अभ्यर्थियों के हितों की अनदेखी की गई।
इस पूरे जातीय षड्यंत्र की रूपरेखा सदस्य-सचिव डॉ. जोशी की देखरेख में रची गई, जिसमें वाराणसी केंद्र के क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अभिजित दीक्षित की पूर्ण भागीदारी थी। इसमें आर्थिक भ्रष्टाचार की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अतः इस पूरी भर्ती को निरस्त करते हुए जांच की जाए और इसके जिम्मेदार दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।
इतना ही नहीं, पिछले दस वर्षों में सभी क्षेत्रीय केंद्रों जैसे वाराणसी, जम्मू, रांची, तिरुपति इत्यादि में भी मुख्यतः जाति विशेष के लोगों की नियुक्ति की गई, जिसके लिए कई बार निर्धारित प्रक्रियाओं की ही नहीं, बल्कि दलित एवं पिछड़ों के हितों की भी अनदेखी की गई। यहां भी आर्थिक लेन-देन की संभावना हो सकती है, जिसकी जांच होनी चाहिए।
साथ ही, डॉ. जोशी द्वारा आईजीएनसीए में प्रमोशन में भी मनमानी करते हुए अपने चहेतों को अनधिकृत रूप से लाभ पहुंचाया गया है।
3. उल्लेखनीय है कि डॉ. सच्चिदानंद जोशी के कार्यकाल में ही वर्ष 2018 में वाराणसी के तत्कालीन क्षेत्रीय निदेशक प्रो. विजय शंकर शुक्ला की पत्नी उषा शुक्ला को वाराणसी केंद्र में ही कोऑर्डिनेटर हिंदी ट्रांसलेटर प्रोजेक्ट के तौर पर नौकरी दी गई थी, जिसके कुछ समय बाद उक्त विषय पर आरटीआई लगने के बाद अपनी गलती पकड़े जाने के अंदेशे के बाद डॉ. जोशी ने उन्हें सेवामुक्त कर दिया था।
4. इन्हीं डॉ. जोशी के इशारे पर आईजीएनसीए के रांची केंद्र में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की बातें और व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप, मानसिक प्रताड़ना, कर्मचारियों का दबाव में इस्तीफा दिया जाना भी जगजाहिर है।
5. डॉ. सच्चिदानंद जोशी के कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय, रायपुर में कुलपति पद पर रहते हुए 10 वर्षों के कार्यकाल में उनकी संलिप्तता अध्यापकों के चयन में नियमों को दरकिनार करने में सामने आने के बावजूद उन्हें इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर आर्ट्स में न केवल पदस्थ किया गया है, बल्कि आज तक कायम रखा गया है, जो कि पीएमओ की शुचिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। इन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए।
6. उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ लोक आयोग की रिपोर्ट भी तत्कालीन कुलपति डॉ. जोशी के भ्रष्ट कृत्य के विरुद्ध थी और आयोग ने प्रदेश के राज्यपाल से कार्रवाई किए जाने की स्पष्ट अनुशंसा की थी, जिस पर आज तक कुछ नहीं किया जाना भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों को स्पष्ट बढ़ावा देना माना जाना चाहिए।
7. डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने यही सारे भ्रष्टाचार से लिप्त कार्य दिल्ली के आईजीएनसीए में आकर नियुक्तियों और अन्य वित्तीय मामलों में किए हैं और विशेषकर इन्होंने जातिगत आधार पर भी लोगों को मनमाफिक ढंग से पदस्थ किया हुआ है। पूर्व में भी कुलपति के रूप में चयन समिति के अध्यक्ष होते हुए डॉ. जोशी द्वारा अयोग्य अभ्यर्थियों को इंटरव्यू में बुलाने और अनुचित चयन करने में छत्तीसगढ़ लोक आयोग ने सीधे उन्हें जिम्मेदार ठहराया हुआ है। डॉ. जोशी के कार्यकाल में हुई नियुक्तियों पर छत्तीसगढ़ में तत्कालीन सचिव निधि छिब्बर ने जांच रिपोर्ट दी थी और फिर लोक आयोग की रिपोर्ट भी उनके खिलाफ आई थी।
8. उस दौरान तत्कालीन कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी की अध्यक्षता वाली चयन समिति पर अंकों के निर्धारण और भर्ती प्रक्रिया में पक्षपात व हेराफेरी के आरोपों को गंभीर माना गया और लोक आयोग ने अकादमिक अंकों का दोबारा मूल्यांकन कर नई मेरिट सूची तैयार करने की अनुशंसा की थी। साथ ही पुनर्मूल्यांकन में अयोग्य पाए जाने वाले पूर्व चयनित शिक्षकों के खिलाफ विधिसम्मत कार्रवाई की बात कही गई। कुशाभाऊ ठाकरे विश्वविद्यालय की यह भर्ती अब सिर्फ पुरानी नियुक्तियों का मामला नहीं रह गई है। अब यह सवाल विश्वविद्यालय की भर्ती व्यवस्था की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी है। जांच और लोक सेवा आयोग की अनुशंसाओं के बाद भी गंभीर भ्रष्टाचार के दोषी डॉ. जोशी पर कार्रवाई नहीं हुई और आश्चर्यजनक रूप से वे रायपुर के कुलपति पद पर कार्यकाल खत्म कर माखनलाल पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल में कुछ कार्य कर वर्ष 2016 में दिल्ली में संस्कृति मंत्रालय के अधीन प्रतिष्ठित पद प्राप्त करने के तिकड़म में सफल रहे।
9. डॉ. जोशी के रायपुर के कार्यकाल में जनसंपर्क अधिकारी की नियुक्ति के मामले में भी लोक आयोग ने उनके खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया था। बाद में हाई कोर्ट, बिलासपुर ने पूरी चयन प्रक्रिया ही निरस्त कर दी। इस मामले में कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता विश्वविद्यालय ने उच्च न्यायालय के समक्ष विश्वविद्यालय की गलती स्वीकार की थी, जिसके तत्कालीन कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी थे और स्पष्टतः उनके द्वारा ही इस भ्रष्टाचार को प्रश्रय दिया गया था।
10. डॉ. सच्चिदानंद जोशी के सदस्य-सचिव के रूप में आईजीएनसीए, दिल्ली के पिछले 10 वर्षों के कार्यकाल में लिए गए आर्थिक निर्णयों की भी जांच की जाए और इस दौरान की लेखा परीक्षा की रिपोर्ट और टिप्पणियों के पालन को भी देखा जाना अत्यंत आवश्यक है। CAG की रिपोर्ट, जिसकी प्रति पत्र के साथ संलग्न है, ये बताती है कि डॉ. सच्चिदानंद जोशी आदतन भ्रष्टाचारी हैं। कृपया इस विषय पर विशेष संज्ञान लें और जांच उपरांत इनके विरुद्ध कठोर दंडात्मक कार्रवाई की जाए।
11. साथ ही यह मांग की जाती है कि उपरोक्त विषयों को ध्यान में रखते हुए डॉ. सच्चिदानंद जोशी की आय से अधिक संपत्ति, ग्रेटर कैलाश आदि स्थानों पर मकान, जमीन आदि के आरोप की भी जांच तुरंत प्रभाव से किए जाने का आदेश देने की आपसे अपेक्षा है।
12. डॉ. जोशी के कार्यकाल में आईजीएनसीए, दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रीय केंद्र खोले जाने, इस हेतु आवंटित बजट, इन स्थानों पर की गई समस्त पदों की नियुक्ति प्रक्रिया, अभ्यर्थियों की आवश्यक योग्यता, दस्तावेज आदि की भी तुरंत जांच के आदेश की अपेक्षा इस पत्र के माध्यम से की जाती है।
13. महोदय, विभिन्न समाचार माध्यमों से मेरे संज्ञान में यह भी आया है कि डॉ. सच्चिदानंद जोशी के कार्यकलापों और पद के दुरुपयोग के मामले को माननीय श्री सुधाकर सिंह, लोकसभा सांसद, बक्सर ने भी प्रधानमंत्री महोदय के समक्ष उठाया है और डॉ. जोशी को तुरंत प्रभाव से हटाने की मांग की है, जिसे मैं भी दोहरा रहा हूं। मैं इसे आपके संज्ञान में विशेषकर उत्तर प्रदेश के वाराणसी स्थित क्षेत्रीय केंद्र के संदर्भ में ला रहा हूं, ताकि अपने प्रदेश में स्थित सरकारी संस्थानों में जातिवाद की स्थापना, दलित, पिछड़ों के संवैधानिक हक की हकमारी और आर्थिक भ्रष्टाचार की अनदेखी किसी भी तरह से न हो और इसके दोषियों को महत्वपूर्ण सरकारी पदों की जिम्मेदारी से तुरंत मुक्त किया जाए।
14. अंत में मेरा आपसे व प्रधानमंत्री कार्यालय से यह भी अनुरोध है कि किसी विशेषज्ञ जांच संस्था को यह जांचने के लिए निर्देशित किया जाए कि ऐसा व्यक्ति, जिसके विरुद्ध इतने गंभीर भ्रष्टाचार के मामले सिद्ध हुए थे, उसकी केंद्र सरकार के अंतर्गत इतने महत्वपूर्ण पद पर नियुक्ति कैसे हुई है? एवं डॉ. जोशी की नियुक्ति के जिम्मेदार अधिकारियों एवं इसके समर्थक पदाधिकारियों की न्यायिक जांच हो एवं इन भ्रष्टाचारी तत्वों के विरुद्ध तुरंत कार्रवाई करने का आदेश किया जाए।