Retail Inflation in India: भारत में महंगाई के मोर्चे पर मई महीने में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। शुक्रवार को जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार, मई 2026 में देश की खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.16 फीसदी थी। हालांकि यह आंकड़ा बाजार के अनुमान 4.0 फीसदी से थोड़ा कम रहा, लेकिन इससे आम लोगों की जेब पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी बनी महंगाई बढ़ने की वजह
विशेषज्ञों के मुताबिक, खाद्य पदार्थों और ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी महंगाई बढ़ने की मुख्य वजह रही है। सब्जियों, फलों, दालों और खाद्य तेलों की कीमतों में आई तेजी का सीधा असर उपभोक्ताओं के खर्च पर पड़ा है। इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और परिवहन लागत में वृद्धि ने भी महंगाई को ऊपर धकेला है।
मिडिल ईस्ट में जारी जंग का असर वैश्विक बाजारों पर
मिडिल ईस्ट में जारी जंग वैश्विक बाजारों को प्रभावित कर रहा है। इस क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की आपूर्ति और कीमतों को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में वृद्धि का असर घरेलू महंगाई पर भी पड़ता है।
मौजूदा महंगाई दर केंद्रीय बैंक के निर्धारित दायरे के भीतर
हालांकि राहत की बात यह है कि खुदरा महंगाई दर अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के मध्यम अवधि के लक्ष्य 4 फीसदी के आसपास बनी हुई है। RBI का लक्ष्य महंगाई को 4 फीसदी के स्तर पर रखना है, जिसमें 2 फीसदी ऊपर या नीचे की गुंजाइश दी गई है। ऐसे में मौजूदा महंगाई दर केंद्रीय बैंक के निर्धारित दायरे के भीतर है।
खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी से बढ़ सकती है महंगाई
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में और तेजी आती है या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल महंगा होता है, तो आने वाले महीनों में महंगाई और बढ़ सकता है। वहीं, अच्छी मानसून बारिश और बेहतर कृषि उत्पादन से खाद्य कीमतों को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
Written By: Geeta Sharma