Ayodhya News: राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि मंदिर परिसर का निर्माण कार्य सितंबर के अंत तक हर स्थिति में पूरा होने की उम्मीद है. उन्होंने बताया कि शुरुआत में एक छोटे मंदिर की कल्पना की गई थी, लेकिन श्रद्धालुओं की सुविधाओं, धार्मिक गतिविधियों और ऐतिहासिक स्मृतियों को ध्यान में रखते हुए पिछले पांच वर्षों में परिसर में करीब 70 निर्माण कार्य जोड़े गए.
नृपेंद्र मिश्रा ने 19 अगस्त को अयोध्या में मंदिर निर्माण की समीक्षा के बाद कहा कि इन निर्माण कार्यों में भगवान की श्रद्धा और पूजा-अर्चना से जुड़े प्रबंधों के साथ-साथ श्रद्धालुओं को सुविधाएं उपलब्ध कराने से संबंधित कार्य भी शामिल हैं. उन्होंने कहा कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान जिन लोगों ने अपना जीवन बलिदान किया, उनकी स्मृति को भी परिसर में स्थान दिया गया है. इसके लिए स्मारकों का निर्माण कराया गया है. निर्माण समिति अध्यक्ष ने बताया कि 70 निर्माण कार्यों की समीक्षा की गई है और अब लगभग यह भरोसा हो गया है कि मंदिर परिसर का निर्माण कार्य सितंबर के अंत तक पूरा हो जाएगा. उन्होंने कहा कि इन पांच वर्षों के दौरान समय-समय पर कई नए कार्य परियोजना में शामिल किए गए, जिन्हें अब अंतिम रूप दिया जा रहा है.
2019 में आया ऐतिहासिक फैसला
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2019 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया. पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से विवादित 2.77 एकड़ भूमि पर मंदिर निर्माण का रास्ता साफ किया और केंद्र सरकार को मंदिर निर्माण के लिए ट्रस्ट गठित करने का निर्देश दिया. मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में मस्जिद निर्माण के लिए अलग से 5 एकड़ भूमि देने का आदेश दिया गया. इसके बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नेतृत्व में मंदिर निर्माण का कार्य आगे बढ़ा.
22 जनवरी 2024 को रामलला की प्राण प्रतिष्ठा
22 जनवरी 2024 का दिन अयोध्या के इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला के बाल स्वरूप की प्राण प्रतिष्ठा की गई. इस भव्य आयोजन में देश-दुनिया की कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं.
नागर शैली में बना भव्य मंदिर
राम मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर स्थापत्य शैली में किया गया है. मंदिर की भव्यता और नक्काशी इसे भारतीय मंदिर वास्तुकला की विशिष्ट पहचान देती है.
मंदिर की प्रमुख विशेषताएं
लंबाई: करीब 380 फीट
चौड़ाई: करीब 250 फीट
ऊंचाई: करीब 161 फीट
मंजिलें: 3
खंभे: 392
नक्काशीदार द्वार: 44
मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान श्रीराम के बाल स्वरूप रामलला की 51 इंच की श्यामवर्ण प्रतिमा स्थापित है. मंदिर की पहली मंजिल पर श्री राम दरबार बनाया गया है.
बिना लोहे और स्टील के निर्माण
राम मंदिर की निर्माण तकनीक की सबसे खास विशेषताओं में से एक यह है कि इसके मुख्य ढांचे में लोहे और स्टील के इस्तेमाल से परहेज किया गया है. मंदिर को लंबे समय तक टिकाऊ बनाए रखने के लिए पारंपरिक निर्माण तकनीकों और विशेष सामग्रियों का इस्तेमाल किया गया है.
राम जन्मभूमि का प्राचीन इतिहास
धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराओं में अयोध्या को भगवान श्रीराम की जन्मभूमि माना जाता है. कुछ मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम के पुत्र कुश ने यहां मंदिर का निर्माण कराया था, जिसका बाद में राजा विक्रमादित्य ने जीर्णोद्धार कराया. हालांकि, इन प्राचीन परंपराओं से जुड़े दावों को इतिहासकार अलग-अलग दृष्टिकोण से देखते हैं.
1528 से शुरू हुआ विवाद
ऐतिहासिक अभिलेखों के अनुसार, 16वीं शताब्दी में बाबर के शासनकाल में अयोध्या में एक मस्जिद का निर्माण हुआ, जिसे बाद में बाबरी मस्जिद के नाम से जाना गया. इसी स्थल को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय तक विवाद चलता रहा. यह विवाद अदालतों तक पहुंचा और कई दशकों तक विभिन्न न्यायिक स्तरों पर इसकी सुनवाई होती रही.
करीब पांच सदियों के संघर्ष के बाद मंदिर निर्माण
राम जन्मभूमि को लेकर हिंदू पक्ष की आस्था और कानूनी संघर्ष कई सदियों तक चलता रहा. आधुनिक दौर में यह विवाद देश के सबसे चर्चित कानूनी मामलों में शामिल रहा. अंततः 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ. इसके बाद अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण शुरू हुआ और 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के साथ मंदिर ने धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा.
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Written by Shailesh Yadav