नई दिल्ली। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने रविवार को घोषणा की कि 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम का आयोजन 22 अगस्त को पुणे में किया जाएगा। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं के लिए आयोजित किया जाएगा।

राहुल गांधी ने यह घोषणा उन छात्र-छात्राओं के समर्थन में की, जिन्होंने सरकार से जवाबदेही की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन किया था।

राहुल गांधी ने की छात्रों की सराहना

राहुल गांधी ने प्रदर्शन में शामिल छात्रों के साहस और संघर्ष की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी आवाज उठाई और कथित रूप से दुर्व्यवहार, मौखिक उत्पीड़न और हिंसा का सामना किया।

उन्होंने विशेष रूप से उन छात्राओं का जिक्र किया, जिन्होंने प्रदर्शन के दौरान ऐसी परिस्थितियों का सामना किया। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "भारत के युवाओं ने जवाबदेही की मांग करते हुए जिस साहस और दृढ़ता के साथ अपनी आवाज बुलंद की है, वह सराहनीय है। उन्होंने शांति, प्रेम और हास्य के साथ अपनी बात रखी। मुझे हर युवा पर गर्व है, खासकर उन लड़कियों पर जिन्होंने कथित तौर पर दुर्व्यवहार, मौखिक हमले और हिंसा का सामना किया। अब उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता।"

पुणे में होने वाले कार्यक्रम की जानकारी देते हुए राहुल गांधी ने कहा कि यह मंच छात्राओं को अपने विचार रखने का अवसर देगा और उनकी आवाज पूरे देश तक पहुंचेगी।

छात्राओं से पंजीकरण कराने की अपील

उन्होंने छात्राओं से कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजीकरण करने की अपील भी की। उन्होंने कहा, "22 अगस्त को 'छात्रों की गूंज' पुणे पहुंच रहा है और इस बार यह कार्यक्रम पूरी तरह छात्राओं के लिए होगा। अब बेटियां बोलेंगी और देश सुनेगा।"

'छात्रों की गूंज' को एक राष्ट्रव्यापी छात्र आंदोलन बताया जा रहा है, जो पेपर लीक, परीक्षा में अनियमितताओं और बढ़ती फीस जैसे मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा है।

यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब जंतर-मंतर पर छात्रों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा व्यवस्था में सुधार और सरकार से जवाबदेही की मांग उठाई थी।

कॉकरोच जनता पार्टी का संसद मार्च

20 जुलाई को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित संसद मार्च में हजारों छात्रों ने हिस्सा लिया था। यह मार्च कई हफ्तों के विरोध प्रदर्शन और जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल के बाद आयोजित किया गया था।

प्रदर्शनकारी कथित पेपर लीक मामलों और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे।

यह भी पढ़ें: भारत-नेपाल रक्षा संबंध होंगे और मजबूत, सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ पहुंचे नेपाल

जब प्रदर्शनकारी संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे और पुलिस बैरिकेड पार करने का प्रयास किया, तो सुरक्षा बलों ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया।

Written By: Pradeep Singh