हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिकीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों के लिए करीब 300 करोड़ रुपये के चिकित्सा उपकरणों और मशीनरी की खरीद एवं स्थापना प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।

मुख्यमंत्री  सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने मंगलवार को हिमाचल प्रदेश मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड की बैठक की अध्यक्षता करते हुए अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के चिकित्सा महाविद्यालयों में इस वर्ष के अंत तक ऑटोमेटेड लेबोरेटरी सिस्टम स्थापित किए जाएंगे। इससे जांच सेवाओं की क्षमता बढ़ेगी और मरीजों को बेहतर एवं तेज निदान सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

PET स्कैन और आधुनिक जांच सुविधाओं पर जोर

सरकार ने लाल बहादुर शास्त्री राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, नेरचौक और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में करीब 50 करोड़ रुपये की लागत से PET स्कैन मशीनें स्थापित करने की प्रक्रिया शुरू की है। वहीं, अटल इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल सुपरस्पेशियलिटी चमियाना के लिए उच्च क्षमता वाली इकोकार्डियोग्राफी मशीनों की खरीद पर दो करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

चिकित्सा महाविद्यालय चंबा में 13 फुल डिजिटल रेडियोग्राफी मशीनों, मैमोग्राफी सहित अन्य उपकरणों के लिए भी निविदाएं जारी की गई हैं। आईजीएमसी शिमला में 4के लैप्रोस्कोपिक सर्जरी सेट, इलेक्ट्रोसर्जिकल स्टेशन और ईसीजी मशीनों की खरीद भी प्रस्तावित है।

दूसरे चरण में 83 करोड़ रुपये की अतिरिक्त खरीद

मुख्यमंत्री ने बताया कि दूसरे चरण में करीब 83 करोड़ रुपये की अतिरिक्त चिकित्सा मशीनरी एवं उपकरणों की खरीद के लिए निविदाएं जारी की जाएंगी। इसमें चंबा मेडिकल कॉलेज में स्किल लैब के लिए मैनिकिन्स, चमियाना और टांडा में बाइप्लेन डीएसए मशीनें तथा मंडी, आईजीएमसी शिमला, टांडा और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों में बोन मैरो ट्रांसप्लांट एवं एफेरेसिस यूनिट की स्थापना शामिल है।

इसके अलावा आईजीएमसी शिमला में रोबोटिक सर्जरी के लिए मशीनरी एवं एनेस्थीसिया उपकरण, रेडियोलॉजी और ऑर्थोपेडिक सर्जरी के लिए आधुनिक उपकरण तथा गायनी यूनिट स्थापित करने का प्रावधान किया गया है।

CT, अल्ट्रासाउंड और डिजिटल एक्स-रे की सुविधा

दूसरे चरण में चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान निदेशालय के तहत पांच संस्थानों के लिए 256-स्लाइस CT स्कैन मशीनों पर 20 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। आठ संस्थानों में 4डी कलर डॉप्लर अल्ट्रासाउंड मशीनों के लिए छह करोड़ रुपये तथा पांच संस्थानों में उच्च क्षमता वाली डिजिटल एक्स-रे मशीनों के लिए 3.75 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को खरीद प्रक्रिया की नियमित निगरानी करने और बिना अनावश्यक देरी के सभी प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करना राज्य सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।

ये भी पढ़ें: 'केजरीवाल कल भी नक्सल थे, आज भी नक्सल हैं...',हर्ष मल्होत्रा का बड़ा बयान

उन्होंने कहा कि आधुनिक जांच और उपचार सुविधाएं मेडिकल कॉलेजों के साथ-साथ जिला अस्पतालों, नागरिक अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध करवाने का लक्ष्य है। इससे मरीजों को बेहतर उपचार अपने घर के नजदीक मिलेगा और गंभीर उपचार के लिए उन्हें प्रदेश से बाहर जाने की आवश्यकता भी कम होगी। बैठक में मुख्य सचिव के.के. पंत, प्रधान सचिव देवेश कुमार और एम. सुधा देवी, सचिव आशीष सिंघमार, निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं डॉ. गोपाल बेरी सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

Written By: एम अतहरउद्दीन मुन्ने भारती