ऑस्ट्रेलियाई शिक्षक एंगस जॉनस्टोन अपने पतंग उड़ाने के शौक के कारण गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज करा चुके है। एंगस जॉनस्टोन ने म्यांमार के लिए धन जुटाने के लिए यह ऐतिहासिक काम को किया। मार्च 2026 में जॉनस्टोन ने विक्टोरिया के किलार्नी में 26 घंटे 15 मिनट और 15 सेकंड तक पतंग हो हवा में उड़ाने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज कर लिया। इसकी शुरुआत 14 मार्च 2026 की सुबह 7 बजे शुरू की। वह दिन और रातभर पतंग को उड़ाते रहे। अगली सुबह उन्होंने अपनी पतंग को नीचे उतारा और अपने शौक के कारण आज गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में अपना नाम शामिल कराकर लोगों को आर्थिक मदद पहुंचाएंगे।

नामुमकिन को किया मुमकिन

दरअसल एंगस जॉनस्टोन के लिए यह रिकॉर्ड बनाना एक बड़ी चुनौती था। जॉनस्टोन ने पतंग उड़ाने के अपने शौक को व्यक्तिगत मिशन के तौर पर भी पूरा करने का सपना देखा। वह पहले म्यांमार में रहकर काम कर चुके थे। उन्होंने इस रिकॉर्ड को म्यांमार में जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य और शिक्षा संबंधी पहल और इसकी सीमाओं पर बसे शरणार्थी समुदायों के लिए धन जुटाने के उपद्देश्य से की थी। जॉनस्टोन ने 14 मार्च 2026 को विक्टोरिया के किलार्नी में कम से कम 24 घंटे तक पतंग को हवा में रखने के लक्ष्य के साथ रिकॉर्ड बनाने का प्रयास शुरु किया था। वह लंबे समय तक लॉन की कुर्सी पर बैठे रहे और पतंग की डोर को पकड़े रहे, हवा की स्थिति को समझा, उसके बदलाव के साथ पतंग को सावधानीपूर्वक संभालते दिखे। दिन के उजाले में अपनी पतंग को उड़ान देना तो ठीक था लेकिन एंगस जॉनस्टोन के सामने सबसे बड़ी चुनौती रात के अंधेरे में सूर्यास्त के बाद आई। रात के अंधेरे में पतंग का आसमान में दिखाई देना नामुमकिन था लेकिन एंगस जॉनस्टोन अपने सपनों की उड़ान को सफल करना चाहते थे, जैसे शब्द भेदी बाण शिक्षा के आधार पर एक नेत्रहीन शख्स केवल आवाज के माध्य से एक लड़ाई को लड़ता है। ठीक वैसे ही एंगस जॉनस्टोन रात के अंधेरे में भी अपनी पतंग की डोर को सावधानीपूर्वक थामे रहे और आखिरकार जॉनस्टोन ने अपने शौक के जरिए लंबे समय तक पतंग उड़ाकर एक रिकॉर्ड कायम करने में सफलता हासिल की।

असाधारण सहनशक्ति बड़ी चुनौती में बदला

जॉनस्टोन के लिए, गिनीज रिकॉर्ड का खिताब म्यांमार की ओर ध्यान आकर्षित करने का एक ज़रिया था, साथ ही साथ कुछ ऐसा करने का भी जो उन्हें बेहद पसंद था। इस रिकॉर्ड ने उनके धन जुटाने के अभियान को एक अनूठा आयाम दिया। जिससे 26 घंटे से ज्यादा समय तक पतंग उड़ाने का उनका प्रयास दान इकट्ठा करने और उस देश के समुदायों की ज़रूरतों को उजागर करने का एक अवसर बन गया। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि महामारी के दौरान विकसित हुआ एक शौक किस प्रकार मानवीय उद्देश्य के साथ एक असाधारण सहनशक्ति के तौर पर बड़ी चुनौती में बदला। इसके साथ ही गिनीज रिकॉर्ड में अपना नाम करा पाने में सफल भी रहे। एक दिन से ज्यादा समय तक पतंग की डोर पकड़े रहने, जागते रहने और हवा पर नज़र रखने के बाद, जॉनस्टोन आखिरकार रंगीन पतंग को ज़मीन पर वापस ले आए और इस तरह उन्होंने गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स का खिताब हासिल किया, साथ ही एक ऐसे नेक काम के लिए हजारों ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जुटाए, जिसका उनसे गहरा व्यक्तिगत संबंध था।


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