Sugar Crisis: भारत में चीनी की कीमतों को काबू में रखने के लिए सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। भारत के इस फैसले के बाद पाकिस्तान की शुगर इंडस्ट्री ने भी अपने यहां जमा अतिरिक्त चीनी का स्टॉक भारत भेजने की इच्छा जताई है। हालांकि, दोनों देशों के बीच मौजूदा तनाव और बंद व्यापारिक रास्तों के कारण यह इतना आसान नहीं है।
भारत में चीनी के दाम बढ़ने का असर अब सीमा पार पाकिस्तान तक भी चर्चा का विषय बन गया है। वहां की चीनी मिलों के पास बड़ी मात्रा में अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है और मिल मालिक इसे जल्द से जल्द बेचने का रास्ता तलाश रहे हैं।इसी बीच भारत सरकार के 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात के फैसले ने पाकिस्तानी शुगर इंडस्ट्री को उम्मीद दी है। पाकिस्तान के चीनी मिल मालिक चाहते हैं कि उनकी सरकार भारत को चीनी भेजने की संभावनाओं पर विचार करे।
पाकिस्तान की मिलों में जमा है 12 लाख टन से ज्यादा चीनी
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां की चीनी मिलों के पास 1.2 मिलियन टन यानी करीब 12 लाख टन से ज्यादा अतिरिक्त चीनी मौजूद है। मिलर्स को डर है कि अगर यह स्टॉक समय पर बाजार में नहीं निकला तो आने वाले गन्ना पेराई सीजन में उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं।पाकिस्तानी शुगर मिल्स एसोसिएशन से जुड़े प्रतिनिधियों का कहना है कि अगले सीजन में भी अच्छी मात्रा में गन्ने की पैदावार होने की उम्मीद है। ऐसे में पुराना स्टॉक बचा रहा तो मिलों के सामने नकदी की समस्या खड़ी हो सकती है।उनका तर्क है कि भारत पाकिस्तान का पड़ोसी देश है। इसलिए अगर दोनों देशों के बीच चीनी व्यापार की अनुमति मिलती है तो दूसरे देशों की तुलना में परिवहन लागत भी कम रह सकती है।
भारत ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात को दी मंजूरी
घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के लिए भारत सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात को मंजूरी दी है।यह आयात टैरिफ रेट कोटा यानी TRQ व्यवस्था के तहत किया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, आयात की अनुमति 31 अक्टूबर 2026 तक लागू रहेगी।चीनी की एक्स-मिल कीमतों में बढ़ोतरी के बीच सरकार का यह कदम घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
चीनी के दाम बढ़ने की वजह क्या है?
भारत में चीनी बाजार पर कई चीजों का असर पड़ रहा है। गन्ने का इस्तेमाल सिर्फ चीनी बनाने के लिए ही नहीं बल्कि इथेनॉल उत्पादन के लिए भी किया जा रहा है।भारत ने पेट्रोल में इथेनॉल की मिलावट बढ़ाने का लक्ष्य रखा है। इसके चलते गन्ने के एक हिस्से को चीनी उत्पादन के बजाय इथेनॉल बनाने में इस्तेमाल किया जाता है।हालांकि, सरकार का रुख है कि देश में घरेलू खपत के लिए पर्याप्त चीनी उपलब्ध है। कीमतों में तेजी के पीछे स्टॉक होल्डिंग और बाजार में सट्टेबाजी जैसे कारण भी बताए गए हैं।
पाकिस्तान की चीनी भारत कैसे आएगी?
पाकिस्तानी मिलर्स भारत को चीनी बेचने की मांग तो कर रहे हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच सामान्य व्यापारिक व्यवस्था फिलहाल चालू नहीं है। भारत-पाकिस्तान के रिश्तों में तनाव के चलते सीधे व्यापार पर कई तरह की पाबंदियां हैं।इसलिए पाकिस्तान से चीनी आयात करने के लिए सिर्फ वहां के मिल मालिकों की इच्छा काफी नहीं होगी। इसके लिए दोनों देशों की सरकारों की मंजूरी और एक अलग व्यापारिक व्यवस्था की जरूरत होगी।यानी भारत में चीनी की जरूरत और पाकिस्तान में अतिरिक्त स्टॉक होने के बावजूद दोनों के बीच चीनी का व्यापार फिलहाल आसान रास्ता नहीं है।
क्या पाकिस्तान की चीनी भारत आ सकती है?
अभी इसे सिर्फ पाकिस्तान की शुगर इंडस्ट्री की मांग के तौर पर देखा जा सकता है। भारत ने जिन 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी है, उसका मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान को भारत में चीनी भेजने की मंजूरी मिल गई है।अगर भविष्य में दोनों देशों के बीच इस तरह के व्यापार को लेकर कोई नीतिगत फैसला होता है, तभी पाकिस्तान का अतिरिक्त स्टॉक भारतीय बाजार तक पहुंच सकेगा।