तेहरान: पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर सोमवार को ईरान की राजधानी तेहरान पहुंचे, जहां वह ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत करेंगे। उनके दौरे को लेकर ईरान ने दोनों देशों के बीच संबंधों को “बेहद अच्छे और विशिष्ट” बताया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने मुनीर के तेहरान पहुंचने से पहले एक प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि उनकी यात्रा दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के ढांचे के तहत हो रही है।

बघाई ने कहा, “ईरान और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंध वास्तव में अपने सबसे अच्छे दौर में से एक से गुजर रहे हैं और दोनों पक्ष सभी क्षेत्रों में इन संबंधों को लगातार विस्तार देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”

क्षेत्रीय तनाव के बीच मुनीर का दौरा

मुनीर का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव बना हुआ है और ईरान तथा अमेरिका के बीच भी लगातार मतभेद जारी हैं। पाकिस्तान इस क्षेत्रीय तनाव के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की कोशिश करता रहा है।

पाकिस्तान इससे पहले पश्चिम एशिया संघर्ष के दौरान वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संपर्क स्थापित कराने में मदद कर चुका है। जून में दोनों देशों के बीच एक अंतरिम समझ बनाने की दिशा में भी प्रयास हुए थे, हालांकि बाद में वह प्रयास विफल हो गया।

ओमान के विदेश मंत्री का दौरा अलग

जब ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता से पूछा गया कि क्या मुनीर का दौरा ओमान के विदेश मंत्री बद्र बिन हमद अल-बुसैदी की प्रस्तावित तेहरान यात्रा से जुड़ा है, तो उन्होंने इससे इनकार किया।

बघाई ने कहा कि दोनों यात्राएं एक-दूसरे से संबंधित नहीं हैं और उनका समय लगभग एक ही होने की वजह से वे साथ-साथ हो रही हैं।

अल-बुसैदी मंगलवार को तेहरान पहुंचने वाले हैं। उनकी बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा तथा होर्मुज जलडमरूमध्य और समुद्री यातायात से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।

सऊदी अरब और तुर्किये के साथ पाकिस्तान का रक्षा समझौता

मुनीर का ईरान दौरा ऐसे समय भी हो रहा है जब पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं।

समझौते के तहत तीनों देशों में से किसी एक पर सशस्त्र हमला होने को तीनों पर हमला माना जाएगा तथा रक्षा सहयोग और सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करने की बात कही गई है।

किसी सैन्य प्रतिक्रिया की सार्वजनिक घोषणा नहीं

समझौते पर हस्ताक्षर के दो दिन बाद सऊदी अरामको की जिजान रिफाइनरी पर हूती ड्रोन हमले के बाद इस व्यवस्था की प्रभावशीलता को लेकर सवाल उठे। हालांकि, हमले के बाद तुर्किये या पाकिस्तान की ओर से तत्काल किसी सैन्य प्रतिक्रिया की सार्वजनिक घोषणा नहीं की गई।

तुर्किये के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने सामूहिक रक्षा प्रावधान की तुलना तकनीकी रूप से नाटो के आर्टिकल 5 से की है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि हमले की स्थिति में सहायता का स्वरूप और स्तर सदस्य देशों के बीच विचार-विमर्श के बाद तय होगा और यह जरूरी नहीं कि सभी देश स्वतः युद्ध में उतर जाएं।

यह भी पढ़ें: जर्मनी के गॉटिंगेन में BNM का प्रदर्शन, बलूचिस्तान में पाकिस्तानी हवाई हमलों का आरोप

ऐसे क्षेत्रीय समीकरणों के बीच असीम मुनीर की तेहरान यात्रा पाकिस्तान की संतुलन साधने वाली कूटनीति पर ध्यान केंद्रित कर रही है। इस्लामाबाद के सऊदी अरब और तुर्किये के साथ करीबी रणनीतिक संबंध हैं, वहीं पड़ोसी ईरान के साथ भी उसके लंबे समय से द्विपक्षीय संबंध कायम हैं।