धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में गुरुवार को 5,000 से अधिक निर्वासित तिब्बतियों ने चीन की नीतियों के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध मार्च निकाला। प्रदर्शनकारियों ने चीन के हाल ही में लागू किए गए ‘Promoting Ethnic Unity and Progress Law’ को वापस लेने की मांग की।

मार्च का नेतृत्व केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) के अध्यक्ष पेनपा त्सेरिंग और निर्वासित तिब्बती संसद की अध्यक्ष डोलमा त्सेरिंग ने किया। तिब्बती सरकार-निर्वासित के कई मंत्री और सांसद भी प्रदर्शन में शामिल हुए। मार्च मैक्लोड गंज से शुरू होकर निचले धर्मशाला स्थित पुलिस ग्राउंड में समाप्त हुआ।

लोबगा रंगजेन को दी श्रद्धांजलि

यह विरोध प्रदर्शन तिब्बत की 17वीं काशाग (शासी परिषद) और 18वीं निर्वासित तिब्बती संसद ने संयुक्त रूप से आयोजित किया था। इसका आयोजन तिब्बती कार्यकर्ता लोबगा रंगजेन के 2 जुलाई को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर आत्मदाह के 49वें दिन के अवसर पर किया गया।

प्रदर्शनकारियों ने रंगजेन और तिब्बत के मुद्दे के लिए जान गंवाने वाले अन्य तिब्बतियों को श्रद्धांजलि दी तथा तिब्बत की स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का अधिक ध्यान आकर्षित करने की मांग की।

तिब्बती बौद्ध परंपरा में किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद 49वां दिन पारंपरिक ‘बार्डो’ यानी मध्यवर्ती अवस्था के पूर्ण होने का प्रतीक माना जाता है।

‘तिब्बती पहचान मिटाने की कोशिश’ का आरोप

निर्वासित तिब्बती संसद की अध्यक्ष डोलमा त्सेरिंग ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य चीन के जातीय एकता कानून का विरोध करना है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह कानून तिब्बती पहचान को खत्म करने के उद्देश्य से लागू किया गया है।

उन्होंने कहा, “हम चीन के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं और जातीय एकता कानून की निंदा करते हैं। हम चाहते हैं कि इसे वापस लिया जाए, क्योंकि इसे तिब्बती पहचान मिटाने के लिए लागू किया गया है।”

तिब्बती कार्यकर्ता लोबसांग ने भी कानून का विरोध करते हुए कहा कि तिब्बती समुदाय इसे स्वीकार नहीं करेगा और चीन को इसे वापस लेना होगा।

संयुक्त राष्ट्र से हस्तक्षेप की अपील

प्रदर्शन में शामिल एक अन्य कार्यकर्ता त्सामटेन ने कहा कि मार्च का उद्देश्य लोबगा रंगजेन को 49वें दिन श्रद्धांजलि देना और चीन के जातीय एकता कानून का विरोध करना भी था। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से मामले में हस्तक्षेप करने की अपील की।

एक अन्य प्रदर्शनकारी तेनजिन फाकडोन ने कहा कि उनका उद्देश्य रंगजेन के आत्मदाह और तिब्बती समुदाय की चिंताओं की ओर अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित करना है।

तेनजिन लेकधेन ने कहा कि प्रदर्शन के दो प्रमुख उद्देश्य थे-चीन के जातीय एकता कानून का विरोध करना और लोबगा रंगजेन के आत्मदाह के 49वें दिन उन्हें श्रद्धांजलि देना।

प्रदर्शनकारियों ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र से तिब्बत में घटनाक्रम पर अधिक ध्यान देने तथा चीन से कथित जातीय एकता कानून को वापस लेने की मांग की।

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यह मार्च निर्वासित तिब्बती समुदाय की एकजुटता प्रदर्शित करने और तिब्बती मुद्दे के समर्थन में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजलि देने का भी अवसर बना।

Written By : Pradeep Singh