दाऊद इब्राहिम के करीबी और D कंपनी के बड़े ड्रग नेटवर्क ऑपरेटर सलीम डोला को पकड़ना जांच एजेंसियों के लिए किसी चुनौती से कम नहीं था। भारत समेत कई देशों में फैले उसके नेटवर्क के चलते उसे ट्रैक करना लगातार चुनौती बना रहा और पिछले कई वर्षों तक भारतीय एजेंसियां तथा इंटरपोल उसकी तलाश में सक्रिय रहे, लेकिन वह बार-बार सुरक्षा घेरे से बच निकलता था। सूत्रों के अनुसार, डोला की गतिविधियों पर नजर रखना बेहद मुश्किल था क्योंकि वह लगातार अपनी जगह बदलता रहता था और डिजिटल ट्रैकिंग से भी बचने की कोशिश करता था। आखिरकार, उसकी एक छोटी सी चूक ने उसकी स्थिति को उजागर कर दिया। बताया जाता है कि दबाव से बचने के लिए उसने तुर्किए के इस्तांबुल में छिपने का ठिकाना बनाया था और वहीं पूरी तरह से गुप्त जीवन जी रहा था।
आखिर वह कैसे पकड़ा गया?
करीब 18 महीनों तक उसने अपने ठिकाने से बाहर निकलना लगभग बंद कर दिया था और किसी से सीधे संपर्क से भी बचता रहा। उसका उद्देश्य था कि वह किसी भी तरह भारतीय एजेंसियों और इंटरपोल की नजर से दूर रहे, लेकिन कुछ समय पहले उसने एक ऐसी गलती कर दी जिसने उसके छिपने की पूरी रणनीति को उजागर कर दिया। सूत्र बताते हैं कि उसने अपने छिपने के पते पर एक कूरियर मंगवाया, और यही कदम उसके लिए निर्णायक साबित हुआ। इस एक डिलीवरी के जरिए एजेंसियों को अहम सुराग मिल गया, जिसके बाद उसकी लोकेशन ट्रैक कर ली गई।
सलीम डोला के पास मिले तीन पासपोर्ट
पुख्ता जानकारी मिलते ही भारतीय एजेंसियों ने इंटरपोल के साथ समन्वय करते हुए तुर्किए पुलिस को सतर्क किया। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने उसके ठिकाने पर छापेमारी की। तलाशी के दौरान उसके पास से तीन अलग-अलग पासपोर्ट बरामद हुए, जिनमें एक बुल्गारिया का पासपोर्ट था जिसमें उसका नाम बदलकर दर्ज था, जबकि दो पासपोर्ट भारतीय पहचान से जुड़े पाए गए।
जारी आगे की कार्रवाई
इस कार्रवाई के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ड्रग नेटवर्क के खिलाफ जांच और तेज कर दी गई। भले ही भारत और तुर्किए के बीच प्रत्यर्पण संधि सीमित है, फिर भी विभिन्न एजेंसियों के समन्वय से उसे भारत लाने में सफलता मिली। जांच एजेंसियों का मानना है कि वह तुर्किए को एक ट्रांजिट हब के रूप में इस्तेमाल कर रहा था, जहां से वह अंतरराष्ट्रीय ड्रग सप्लाई नेटवर्क को संचालित करता था। इस्तांबुल की भौगोलिक स्थिति एशिया, यूरोप और मिडिल ईस्ट के बीच उसके नेटवर्क के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण थी।
नेटवर्क की जांच जारी
जानकारी के मुताबिक उसका नेटवर्क कई देशों में फैला हुआ था और इसमें कई अंतरराष्ट्रीय तस्कर शामिल थे। वह मुख्य रूप से सिंथेटिक ड्रग्स, खासकर एमडीएमए जैसी नशीली दवाओं की सप्लाई सिस्टम को नियंत्रित करता था। फिलहाल जांच एजेंसियां उससे पूछताछ कर रही हैं और उसके पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़कर उसे पूरी तरह ध्वस्त करने की कोशिश जारी है।
Written By Toshi Shah