मुंबई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से सभी राजनीतिक दलों से राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में महिला आरक्षण लागू करने के लिए समर्थन की अपील के बाद एनसीपी (शरदचंद्र पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि विपक्ष पहले ही महिला आरक्षण बिल का समर्थन कर चुका है और साल 2023 में यह विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो गया था।
महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका है
सुप्रिया सुले ने शनिवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा, "महिला आरक्षण बिल 2023 में पास हो चुका है। हमने इसे पहले ही एकजुट होकर, एक आवाज और एक वोट के साथ पारित किया था। यह बिल संसद के दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पास हुआ था।"
प्रधानमंत्री मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में दिए गए "दिमागी नक्सल" वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुले ने कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "इस बारे में आपको प्रधानमंत्री से ही पूछना होगा।"
किसान और युवा मोदी सरकार के खिलाफ
वहीं, कांग्रेस सांसद रजनी पाटिल ने प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अब महसूस हो गया है कि देश के किसान और युवा उनकी सरकार के खिलाफ खड़े हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से सरकार अब उनके समर्थन में घोषणाएं कर रही है।
महिला आरक्षण को लेकर रजनी पाटिल ने कहा कि महिलाओं को राजनीतिक आरक्षण देने का विचार पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी का था। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार महिला आरक्षण लागू करने के नाम पर परिसीमन प्रक्रिया को जोड़ रही है, जिसका विपक्ष विरोध कर रहा है।
रजनी पाटिल ने कहा, "प्रधानमंत्री को समझ आ गया होगा कि देश के युवा और किसान अब उनके खिलाफ जा रहे हैं। राहुल गांधी काफी समय से यह बात कह रहे हैं। महिला आरक्षण राजीव गांधी की पहल थी। हम महिला आरक्षण के नाम पर किए जा रहे परिसीमन का विरोध कर रहे हैं।"
कांग्रेस सांसद ने उठाए सरकार की मंशा पर सवाल
कांग्रेस सांसद जेबी माथेर ने भी सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर प्रधानमंत्री मोदी और उनकी सरकार महिला आरक्षण को लेकर गंभीर होती तो इसे अब तक लागू कर दिया गया होता। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार परिसीमन को आगे बढ़ाने के लिए महिला आरक्षण बिल का इस्तेमाल कर रही है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले से अपने संबोधन में सभी राजनीतिक दलों से अपील की थी कि वे महिलाओं को राज्य विधानसभाओं और लोकसभा में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के लिए आगे आएं।
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पीएम मोदी ने कहा कि देश की नीतियां बनाने में महिलाओं की भागीदारी बेहद जरूरी है। उन्होंने पंचायतों, नगरपालिकाओं और नगर निगमों में महिलाओं के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि संसद में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य राजनीति में महिलाओं की भागीदारी को मजबूत करना है।
Written By: Pradeep Singh