काठमांडू। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री और नेपाली कांग्रेस के अध्यक्ष शेर बहादुर देउबा करीब छह महीने विदेश में इलाज कराने के बाद गुरुवार को काठमांडू लौट आए। सितंबर 2025 में हुए Gen-Z प्रदर्शनों के दौरान उनके आवास पर हमला हुआ था, जिसमें देउबा और उनकी पत्नी आरजू राणा देउबा घायल हो गए थे। इसके बाद दोनों इलाज के लिए विदेश चले गए थे।
काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर देउबा का नेपाली कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। उनके स्वागत के लिए संगीत बैंड और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का भी आयोजन किया गया। पार्टी के हजारों कार्यकर्ता हवाईअड्डे पर मौजूद रहे।
‘सत्ता हासिल करने नहीं, एकता मजबूत करने लौटा हूं’
नेपाल लौटने के बाद देउबा ने अपने बयान में कहा कि वह सत्ता हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के उद्देश्य से वापस आए हैं। उन्होंने देश में राजनीतिक विभाजन और कटुता को खत्म कर आपसी मेल-मिलाप का रास्ता अपनाने की अपील की।
देउबा ने कहा कि युवाओं की बदलाव की मांग को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि बदलाव का अर्थ यह नहीं है कि पिछली पीढ़ियों के संघर्ष, बलिदान और योगदान को गलत ठहराया जाए।
नेपाली कांग्रेस में नेतृत्व को लेकर घमासान
देउबा की वापसी ऐसे समय हुई है जब नेपाली कांग्रेस के भीतर नेतृत्व और संगठनात्मक पुनर्गठन को लेकर खींचतान तेज है। पार्टी के गैर-स्थापना धड़े का राष्ट्रीय जमावड़ा 14 से 16 अगस्त तक काठमांडू में होना है, जिसमें देउबा शुक्रवार को संबोधित करेंगे।
पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर चल रहे विवाद का एक मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। अदालत ने अगस्त के पहले सप्ताह में समीक्षा याचिका स्वीकार करते हुए मामले को तीन सदस्यीय पीठ के सामने दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया है। इस फैसले का असर नेपाली कांग्रेस के आधिकारिक नेतृत्व और पार्टी की भविष्य की दिशा पर पड़ सकता है।
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में भी जांच जारी
देउबा और उनकी पत्नी से जुड़ा मनी लॉन्ड्रिंग का मामला भी चर्चा में है। जांच के दौरान उनके और परिवार के कुछ सदस्यों के नाम दर्ज चल-अचल संपत्तियों को फ्रीज किया गया था। देउबा के समर्थकों ने आरोपों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है और कहा है कि मामला कानूनी प्रक्रिया के तहत साफ हो जाएगा।
युवाओं और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन पर जोर
अपने बयान में देउबा ने कहा कि नेपाली कांग्रेस को अहंकार के आधार पर नहीं, बल्कि जनता के हितों को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने युवाओं को नेतृत्व में अधिक अवसर देने की वकालत की, लेकिन साथ ही अनुभवी नेताओं को समस्या के रूप में पेश किए जाने वाली सोच को खारिज किया।
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उन्होंने कहा कि अपने लंबे राजनीतिक अनुभव को नई पीढ़ी के साथ साझा करना उनकी जिम्मेदारी है। साथ ही उन्होंने संविधान की रक्षा, आवश्यक सुधार और देश में लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए राजनीतिक दलों के बीच राष्ट्रीय सहमति और सहयोग की जरूरत पर जोर दिया।
Written By : Pradeep Singh