नई दिल्ली। बक्सर लोकसभा से सांसद सुधाकर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजकर डॉ. सच्चिदानंद जोशी की नियुक्ति और उनके पूर्व कार्यकाल में की गई अनियमितताओं की जांच की मांग की है। इतना ही नहीं सांसद ने अपने पत्र में यह भी कहा है कि छत्तीसगढ़ लोक आयोग की जांच में डॉ. जोशी के खिलाफ चयन प्रक्रिया में अनियमितताएं पाई गई थी। उसकी जांच में सभी तथ्य उनके खिलाफ पाए गए और नियमों के हिसाब से कार्रवाई की सिफारिश की थी। ऐसे में सवाल उठता है कि डॉ. जोशी को इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में सदस्य-सचिव जैसे बड़े पद की जिम्मेदारी क्यों और कैसे सौंपी गई है। गौरतलब है कि डॉ. सच्चिदानंद जोशी पिछले एक दशक से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईएनजीसीए), नई दिल्ली के सदस्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं।
कौन से पद पर मिली नियुक्ति
सांसद ने आरोप लगाते हुए कहा कि इस सब के बाद इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में डॉ. जोशी को सदस्य-सचिव जैसे बड़े पद की जिम्मेदारी के साथ ही भारतीय विरासत संस्थान नोएडा के कुलपति का पद भी सौंपा गया। इस मामले को उठाते हुए सांसद ने पीएम कार्यालय से सवाल किया है कि जब तमाम साक्ष्य मौजूद थे तो उसके बाद भी आखिर कैसे उन्हें इन महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति मिल गई। क्या नियुक्ति से पूर्व उनके दस्तावेज की जांच और सतर्कता संबंधी जांच कैसे नहीं की गई?
सांसद ने बताया मामला
सांसद सुधाकर सिंह ने पत्र में इन मुद्दों पर प्रकाश डालते हुए पीएम को इस बात से भी अवगत कराया कि मामला कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में नियुक्तियों से जुड़ा है। शिकायत के मुताबिक तत्कालीन कुलपति डॉ. सच्चिदानंद जोशी उस भर्ती प्रक्रिया के लिए गठित चयन समिति के अध्यक्ष थे। विश्वविद्यालय में शिक्षकों की नियुक्ति के दौरान निर्धारित पात्रता, अकादमिक उपलब्धियों और अनुभव के आधार पर अंक देने की प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती गई। कुछ ऐसे अभ्यर्थियों को भी इस नियुक्ति के साक्षात्कार में बुलाया गया। जिन्हें विश्वविद्यालय की स्क्रूटिनी समिति ने उनकी पात्रता के आधार पर योग्य नहीं पाया था। कुछ उम्मीदवारों को इस चयन प्रक्रिया के दौरान निर्धारित मानकों से ज्यादा अंक दिए गए, जबकि अन्य उम्मीदवारों को उनकी योग्यता और हिसाब से कम अंक दिए गए थे।
अभिलेखों के आधार पर अलग ही स्थिति बनी
मामले में छत्तीसगढ़ शासन के उच्च शिक्षा विभाग से रिपोर्ट तलब की गई थी। जिसमें हवाला दिया गया कि आशुतोष मंडावी को तृतीय श्रेणी में उत्तीर्ण होने के बाद भी 8 अंक दिए गए, जबकि संबंधित मानदंड के मुताबिक 5 अंक तय गिए गए थे। अनुभव के लिए भी निर्धारित अवधि से संबंधित सवाल उठाए गए। विभाग द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के हिसाब से कुछ अन्य आरोप पूरी तरह साबित नहीं हुए हैं। कुछ बिंदुओं पर विश्वविद्यालय से प्राप्त अभिलेखों के आधार पर अलग ही स्थिति बनी। शिकायत में शैलेन्द्र खंडेलवाल के अनुभव और अन्य अकादमिक उपलब्धियों के लिए दिए अंकों पर सवाल उठाए गए। इसी तरह पंकज नयन पांडेय को स्क्रूटिनी समिति द्वारा अयोग्य घोषित किए जाने के बावजूद साक्षात्कार में बुलाए जाने और चयन किए जाने का उल्लेख किया गया है। विभाष झा के मामले में रिपोर्ट में यह स्पष्ट किया गया कि उन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था, लेकिन उनका चयन नहीं हुआ।
साक्षात्कार में अयोग्य अभ्यर्थियों को किया शामिल
सांसद के पत्र की माने तो छत्तीसगढ़ लोक आयोग ने जांच के बाद भर्ती प्रक्रिया में निर्धारित चयन मापदंडों की अनदेखी और अयोग्य अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में शामिल किए जाने समेत कई अलग बिंदुओं पर कार्रवाई की अनुशंसा हुई थी। लोकायुक्त की नियुक्ति में भर्ती के लिए अकादमिक और अनुभव के आधार पर दिए 80 प्रतिशत अंकों की फिर से जांच होना और साक्षात्कार के अंकों को जोड़कर मेरिट तैयार करने की बात कही गई थी। साथ ही अयोग्य पाए गए पूर्व चयनित उम्मीदवारों के खिलाफ विधि अनुसार कार्रवाई की लागू किया जाए।
अन्य कई मामलों को किया उजागर
सांसद ने प्रधानमंत्री से पत्र में यह मांग भी रही है कि डॉ. जोशी के इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में कार्यकाल के दौरान केंद्रों की स्थापना, नियुक्तियों, संविदा नियुक्तियों, पद सृजन, खरीद, निविदाओं, निर्माण, किराये, परामर्श सेवाओं और प्रशासनिक व वित्तीय सुझावों की जांच होनी चाहिए। वाराणसी में संविदा नियुक्तियों के दौरान आरक्षण रोस्टर की कथित अनदेखी को लेकर भी जांच की मांग की गई है। साथ ही डॉ. जोशी के विभिन्न कार्यकालों में खरीद, निविदा, निर्माण, किराया, परामर्श, संविदा सेवाओं, कार्यक्रमों, यात्रा, मानदेय, अनुदान और परियोजनाओं से जुड़े वित्तीय मामलों के लेखा जोखा व खर्चे की जांच कराए जाने की मांग भी रखी गई।
डॉ. जोशी को जांच के बाद उनके पद से हटाने की कही बात
इसके साथ ही डॉ. जोशी को उनके भारतीय विरासत संस्थान, नोएडा के कुलपति और इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के सदस्य-सचिव पद से हटाकर उनके कार्यकाल से संबंधित मूल एवं इलेक्ट्रॉनिक अभिलेख सुरक्षित कराने और प्रशासनिक एवं वित्तीय फैसलों की समीक्षा कराने पर भी जोर दिया गया है। इसके साथ ही पत्र में कहा गया है कि अगर जांच के बाद कोई नियुक्ति अवैध पाई जाती है तो उसे तुरंत रद्द किया जाए और डॉ. जोशी को उच्च पदों पर तैनात करने वाले अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही बरतने के लिए जवाबदेही तय की जाए। इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि जो भी दस्तावेज बंद किए गए हैं। उसमें तथ्य और शिकायकर्ता के दावे तथा लेखे के आधार पर ही देखा जाना बेहद जरूरी है। इन प्रस्तुत किए गए दस्तावेज में छत्तीसगढ़ लोकायुक्त से संबंधित 23-पृष्ठीय अभिलेख को भी शामिल करने की बात कही गई है।
Written By: MADHVI TANWAR