दिल्ली हाई कोर्ट ने अभिनेत्री तब्बू की पर्सनैलिटी और पब्लिसिटी राइट्स की सुरक्षा को लेकर बड़ा अंतरिम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने तब्बू के नाम, तस्वीर, आवाज, फोटो, हस्ताक्षर, फिल्म स्टिल और उनकी पहचान से जुड़ी अन्य विशेषताओं के बिना अनुमति इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। यह रोक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डीपफेक, फेस मॉर्फिंग, मशीन लर्निंग और अन्य डिजिटल तकनीकों के जरिए किए जाने वाले दुरुपयोग पर भी लागू होगी।

जस्टिस ज्योति सिंह ने तब्बू की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। कोर्ट ने शुरुआती तौर पर माना कि अभिनेत्री ने अपने पक्ष में मजबूत मामला पेश किया है और यदि उन्हें तत्काल सुरक्षा नहीं दी गई, तो उनकी प्रतिष्ठा और व्यावसायिक पहचान को ऐसी क्षति हो सकती है जिसकी बाद में भरपाई मुश्किल होगी।

Google, Meta, X और Reddit को URL हटाने के निर्देश

कोर्ट ने कई प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म को तब्बू से संबंधित आपत्तिजनक और अनधिकृत सामग्री हटाने या उसकी पहुंच बंद करने का निर्देश दिया है। Google LLC को अलग-अलग दस्तावेजों में सूचीबद्ध 21, 8 और 5 URL पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। इसी तरह Meta Platforms Inc. को 73, 28 और 5 URL हटाने या डिसेबल करने का निर्देश दिया गया है।

X Corp. को तीन पहचाने गए URL हटाने और Reddit Inc. को आदेश में बताए गए URL पर कार्रवाई करने को कहा गया है। eBay Inc. को भी सूची में शामिल कुछ URL हटाने का निर्देश मिला है। इन सभी मामलों में संबंधित प्लेटफॉर्म को आदेश मिलने के 36 घंटे के भीतर कार्रवाई करने को कहा गया है। इस तरह आदेश में अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर पहचाने गए 150 से अधिक URL शामिल हैं।

AI और डीपफेक कंटेंट पर भी रोक

मामले का सबसे महत्वपूर्ण पहलू AI और डिजिटल तकनीक से जुड़े कंटेंट को लेकर है। तब्बू ने आरोप लगाया था कि उनकी फिल्मों, इंटरव्यू और सार्वजनिक कार्यक्रमों के वीडियो व तस्वीरों में बदलाव करके अश्लील और आपत्तिजनक AI-जनरेटेड सामग्री तैयार की जा रही है। शिकायत के मुताबिक, कुछ फिल्मी दृश्यों को एडिट, स्लो या जूम करके उन्हें आपत्तिजनक तरीके से पेश किया गया और फिर सोशल मीडिया तथा दूसरी वेबसाइटों पर ट्रैफिक और कमाई के लिए प्रसारित किया गया।

कोर्ट ने प्रथम दृष्टया माना कि इस तरह का कंटेंट तब्बू की गुडविल, प्रतिष्ठा और व्यावसायिक मूल्य को नुकसान पहुंचा सकता है। अदालत ने स्पष्ट किया कि AI, जनरेटिव AI, डीपफेक, फेस मॉर्फिंग और GIF जैसी तकनीकों के जरिए उनकी पहचान का दुरुपयोग भी अंतरिम निषेधाज्ञा के दायरे में आएगा।

फर्जी बुकिंग अकाउंट और मर्चेंडाइज की शिकायत

तब्बू ने एक Instagram अकाउंट को लेकर भी शिकायत की थी, जिसमें कथित तौर पर उनकी मौजूदगी और परफॉर्मेंस के लिए बुकिंग की पेशकश की जा रही थी। अभिनेत्री के मुताबिक, उनका इस अकाउंट से कोई संबंध नहीं था और उन्होंने किसी को अपनी ओर से ऐसी बुकिंग करने की अनुमति नहीं दी थी। इसके अलावा, कुछ वेबसाइटों पर तब्बू की तस्वीरों वाले मग, पोस्टर, कैलेंडर, हुडी, स्वेटशर्ट और अन्य सामान बेचने का भी आरोप लगाया गया। अभिनेत्री की ओर से कहा गया कि इस तरह का इस्तेमाल उनके नाम और पहचान से जुड़ी व्यावसायिक प्रतिष्ठा का बिना अनुमति फायदा उठाने के बराबर है।

फर्जी बयान को लेकर भी कोर्ट ने जताई नाराजगी

तब्बू ने एक ऑनलाइन प्रकाशन के खिलाफ भी शिकायत की थी, जिसने उनके नाम से कथित तौर पर एक मनगढ़ंत और अपमानजनक बयान प्रकाशित किया था। अभिनेत्री ने कहा कि उन्होंने ऐसा कोई बयान नहीं दिया था और उनकी टीम पहले ही प्रमुख अखबारों के जरिए इसका खंडन कर चुकी थी। इसके बावजूद सामग्री को जारी रखने पर कोर्ट ने गंभीर चिंता जताई। अदालत ने कहा कि खंडन के बावजूद ऐसी सामग्री को प्रसारित करना चिंताजनक है और प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि इसका उद्देश्य सनसनीखेज सामग्री के जरिए ट्रैफिक और कमाई हासिल करना था।

पर्सनैलिटी राइट्स को लेकर कोर्ट की अहम टिप्पणी

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने पिछले फैसलों का भी उल्लेख किया, जिनमें सेलिब्रिटीज के पर्सनैलिटी राइट्स की सुरक्षा को मान्यता दी गई है। कोर्ट ने कहा कि किसी प्रसिद्ध व्यक्ति के नाम, तस्वीर या पहचान से जुड़ी विशिष्ट विशेषताओं का बिना अनुमति व्यावसायिक इस्तेमाल उनके अधिकारों का उल्लंघन कर सकता है। अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि पर्सनैलिटी राइट्स का सवाल केवल आर्थिक नुकसान तक सीमित नहीं है। किसी व्यक्ति की पहचान का अनधिकृत इस्तेमाल उसकी प्राइवेसी, प्रतिष्ठा और सम्मान के साथ जीने के अधिकार को भी प्रभावित कर सकता है।

प्लेटफॉर्म से मांगी गई अकाउंट और IP जानकारी

कोर्ट ने Google, Meta, X, Reddit और GoDaddy को, जहां लागू हो, संबंधित अकाउंट्स की बेसिक सब्सक्राइबर जानकारी और IP लॉग डिटेल उपलब्ध कराने का निर्देश भी दिया है। इससे तब्बू की टीम को कथित रूप से उनकी पहचान का दुरुपयोग करने वाले लोगों या अकाउंट संचालकों की पहचान करने में मदद मिल सकती है।

अगली सुनवाई 7 दिसंबर को

कोर्ट ने मामले को कमर्शियल केस के रूप में दर्ज करते हुए प्रतिवादियों को समन जारी किया है। बाकी प्रतिवादियों को समन मिलने के 30 दिनों के भीतर अपना लिखित बयान दाखिल करने का निर्देश दिया गया है। दस्तावेजों की खोज, पेशी और निरीक्षण से संबंधित कार्यवाही भी शुरू कर दी गई है। मामले की अगली सुनवाई 7 दिसंबर 2026 को होगी।

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अंतरिम रोक फिलहाल अगली सुनवाई तक लागू रहेगी, हालांकि यह अदालत के आगे के आदेशों के अधीन है। फिलहाल, यह आदेश मामले के आरोपों पर अंतिम फैसला नहीं है। हाई कोर्ट ने प्रथम दृष्टया मामला और अपूरणीय क्षति की संभावना को देखते हुए तब्बू को अंतरिम सुरक्षा प्रदान की है।

Written By: Geeta Sharma