18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की शादी को लेकर ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी के बयान पर बीजेपी नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। नेताओं ने स्पष्ट कहा कि भारत संविधान से चलता है, शरिया से नहीं।
संवैधानिक व्यवस्था स्वीकार नहीं है, तो उसे देश छोड़ देना चाहिए- मरांडी
झारखंड विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने रशीदी के बयान पर निशाना साधते हुए कहा कि देश में रहने वाले हर व्यक्ति को संविधान का पालन करना होगा, उन्होंने कहा कि भारत में वही व्यवस्था लागू होगी जो संविधान तय करता है। मरांडी ने यह भी कहा कि अगर किसी व्यक्ति को संवैधानिक व्यवस्था स्वीकार नहीं है, तो उसे देश छोड़ देना चाहिए।
भारत सरकार उनके टिकट का देगी पैसा- मरांडी
मरांडी ने आगे कहा कि जिन लोगों ने कहा था कि हिंदू और मुसलमान साथ नहीं रह सकते, उन्होंने पाकिस्तान की मांग की और भारत का बंटवारा हुआ, वे लोग पाकिस्तान चले गए। मुझे लगता है कि अगर उन्हें (मौलाना साजिद रशीदी को) संविधान के अनुसार यहां रहने में कोई दिक्कत है, तो ऐसे लोगों को पाकिस्तान चले जाना चाहिए। अगर उनके पास जाने के लिए पैसे नहीं हैं, तो भारत सरकार उनके टिकट का इंतजाम कर देगी लेकिन भारत में भारतीय संविधान लागू है और देश इसी के अनुसार चलेगा। हर भारतीय को इसका सख्ती से पालन करना होगा।
शाहनवाज हुसैन ने भी की आलोचना
बीजेपी नेता सैयद शाहनवाज हुसैन ने भी मौलाना साजिद रशीदी के बयान को अनुचित बताया, उन्होंने कहा कि इस तरह की टिप्पणियां पूरे समुदाय की छवि को नुकसान पहुंचाती हैं। हुसैन ने बयान की निंदा करते हुए कहा कि ऐसी भाषा से बचना चाहिए और रशीदी को अपनी टिप्पणी पर माफी मांगनी चाहिए।
संविधान सर्वोपरि है- बृजलाल
वहीं, बीजेपी सांसद बृजलाल ने भी रशीदी के बयान पर आपत्ति जताई, उन्होंने कहा कि भारत में शासन संविधान के नियमों के मुताबिक चलता है, किसी धार्मिक व्यवस्था के आधार पर नहीं, उन्होंने कहा कि देश में शरिया कानून लागू नहीं हो सकता और सभी नागरिकों को संवैधानिक प्रावधानों का पालन करना होगा। बृजलाल ने रशीदी के उस दावे को भी गलत बताया जिसमें उन्होंने अपराध बढ़ने का कारण लड़कियों की शादी में देरी को बताया था, उन्होंने कहा कि कम उम्र में विवाह की परंपरा पुराने समय में भी समस्याओं का कारण रही थी और ऐसे मुद्दों को इस तरह पेश करना उचित नहीं है।
रशीदी ने अपने बयान का किया बचाव
मौलाना मोहम्मद साजिद रशीदी ने हाल ही में कहा था कि लड़कियों की शादी देरी के कारण दुष्कर्म जैसे अपराधों में वृद्धि हो रही है। विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने अपने बयान का बचाव किया और कहा कि उनकी बातों को गलत संदर्भ में पेश किया गया। रशीदी ने दावा किया कि उन्होंने कभी भी 18 वर्ष से कम उम्र की लड़कियों की शादी का समर्थन नहीं किया, उनका कहना है कि उनके बयान को राजनीतिक उद्देश्य से तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
Written By Toshi Shah