जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी ने पूर्व आईएएस अधिकारी नियाज़ खान द्वारा मुसलमानों को मॉब लिंचिंग से बचने के लिए अपनी वेशभूषा बदलने और पारंपरिक पहचान छोड़ने की सलाह पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है, उन्होंने इसे समस्या की गलत समझ और तथ्यों की अनदेखी बताते हुए कहा कि ऐसी सलाह देना दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक है।
मॉब लिंचिंग की असली वजह किसी व्यक्ति की दाढ़ी नहीं- मदनी
मदनी ने कहा कि मॉब लिंचिंग की असली वजह किसी व्यक्ति की दाढ़ी, टोपी, हिजाब या कुर्ता-पायजामा नहीं, बल्कि हमलावरों के मन में मौजूद नफरत और वह माहौल है, जिसमें भीड़ खुद को कानून से ऊपर समझने लगती है। उन्होंने कहा कि अपराधियों पर कार्रवाई करने के बजाय पीड़ित से अपनी पहचान बदलने की अपेक्षा करना न तो न्यायसंगत है और न ही किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप।
वेशभूषा नहीं, नफरत है हिंसा की वजह
मौलाना मदनी ने कहा कि मॉब लिंचिंग की कई घटनाएं इस बात का प्रमाण हैं कि पीड़ितों की वेशभूषा हमलों का कारण नहीं थी। उन्होंने 2015 में दादरी में मोहम्मद अखलाक, 2018 में अलवर के रकबर खान और हापुड़ के कासिम कुरैशी, 2019 में झारखंड के तबरेज अंसारी, 2023 में भरतपुर के नासिर और जुनैद तथा 2025 में चरखी दादरी के साबिर मलिक की हत्या का उल्लेख करते हुए कहा कि इन सभी मामलों में पहनावा हिंसा की वजह नहीं था।
बोस्निया का उदाहरण देकर रखा पक्ष
मदनी ने बोस्निया का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के मुसलमान भाषा, पहनावे और रहन-सहन के मामले में अपने ईसाई पड़ोसियों से अलग नहीं दिखते थे, फिर भी उन्हें सामूहिक नरसंहार और नस्लीय हिंसा का सामना करना पड़ा। इससे स्पष्ट है कि केवल पहचान बदल लेना सुरक्षा की गारंटी नहीं बन सकता।
अपराधियों पर हो सख्त कार्रवाई
मदनी ने कहा कि असली सवाल यह है कि किसी भीड़ को किसी नागरिक की पहचान पूछने, उसका पीछा करने, उस पर हमला करने और उसकी हत्या करने का साहस कैसे मिलता है। यदि बहस का केंद्र अपराधियों के बजाय पीड़ित की वेशभूषा बन जाएगी, तो हिंसा की जिम्मेदारी अनजाने में अपराधियों से हटकर पीड़ितों पर आ जाएगी।
कानून का सख्ती से पालन करने की है आवश्यकता- मौलाना मदनी
मौलाना मदनी ने कहा कि देश में शांति और कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कानून का सख्ती से पालन आवश्यक है, उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तहसीन एस. पूनावाला बनाम भारत संघ मामले में जारी दिशा-निर्देशों के प्रभावी क्रियान्वयन, भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(2) के निष्पक्ष अनुपालन तथा मॉब लिंचिंग के दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की साथ ही उन्होंने सभी जिम्मेदार नागरिकों से समाज में शांति, कानून के शासन और आपसी सौहार्द को मजबूत करने की अपील की।
Writen By : M. Athar Uddin Munne Bharati
Edited By : Toshi Shah