मनोज बाजपेयी ने हाल ही में अपने अभिनय सफर और निजी अनुभवों को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने स्वीकार किया कि पिछले करीब दस वर्षों के दौरान कई बार उनके मन में अभिनय छोड़ने का विचार आया। हालांकि, हर बार कोई न कोई दिलचस्प किरदार उन्हें फिर से काम करने के लिए प्रेरित कर देता है। एक बातचीत के दौरान मनोज ने कहा कि वह केवल मजबूरी में काम करते रहना नहीं चाहते। उनके अनुसार, अभिनय तभी सार्थक लगता है जब कोई ऐसा किरदार मिले जिसे निभाने में रचनात्मक संतुष्टि और आनंद महसूस हो। उनका मानना है कि सिर्फ रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने के लिए अभिनय करना उनके स्वभाव के अनुरूप नहीं है।

ऐसी फिल्म करना चाहते हैं मनोज बाजपेयी

मनोज बाजपेयी ने यह भी बताया कि लंबे समय तक गंभीर और मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाने के बाद अब उनका झुकाव हल्की-फुल्की और मनोरंजक फिल्मों की ओर बढ़ रहा है। मनोज का कहना है कि वह ऐसी कॉमेडी फिल्मों में काम करना चाहते हैं जिनमें ज्यादा मानसिक दबाव न हो, जहां गाने, मस्ती और मनोरंजन का माहौल हो तथा सेट पर काम का अनुभव सहज और आनंददायक लगे।

संवेदनशील किरदारों का प्रभाव आज भी- मनोज बाजपेयी

अभिनेता ने स्वीकार किया कि उनके द्वारा निभाए गए कई गहरे और संवेदनशील किरदारों का प्रभाव आज भी उनके भीतर कहीं न कहीं मौजूद है। उन्होंने कहा कि कुछ भूमिकाएं कलाकार के मन पर स्थायी छाप छोड़ जाती हैं, जिसके कारण कभी-कभी भावनात्मक उतार-चढ़ाव और मानसिक थकान का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में आध्यात्मिकता उन्हें संतुलन बनाए रखने में मदद करती है।

एक्टर ने अपने करियर को लेकर कही ये बात

बातचीत के दौरान मनोज बाजपेयी ने अपने करियर की सफलता के लिए किए गए व्यक्तिगत त्यागों पर भी चर्चा की। उन्होंने माना कि अभिनय के सपने को पूरा करने की राह में उन्हें परिवार, खासकर अपने माता-पिता के साथ बिताने वाला काफी समय गंवाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कभी-कभी उन्हें लगता है कि यदि पिता के साथ कुछ और समय बिताने का अवसर मिलता तो दोनों एक-दूसरे को बेहतर ढंग से समझ पाते। इसी तरह मां के साथ भी कई निजी विषयों पर अधिक बातचीत की जा सकती थी।

अपने करियर की उपलब्धियों से संतुष्ट हैं एक्टर

हालांकि वह अपने करियर की उपलब्धियों से संतुष्ट हैं, लेकिन उनका मानना है कि जीवन में भौतिक सफलता हासिल करने के बाद व्यक्ति पीछे मुड़कर देखता है तो उसे एहसास होता है कि कुछ रिश्ते और पल किसी भी उपलब्धि से कहीं ज्यादा मूल्यवान होते हैं।

 

 

 

 

Written By Toshi Shah