झारखंड में हेमंत सोरेन सरकार को JPSC की परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के मामले में हाई कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। झारखंड हाई कोर्ट ने सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसके तहत JPSC की कई परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला लिया गया था। मामले की सुनवाई गुरुवार को जस्टिस दीपक रौशन की अदालत में हुई।
सरकार के फैसले के खिलाफ चयनित अभ्यर्थियों और नवनियुक्त अधिकारियों ने हाई कोर्ट का रुख किया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा और अमृतांश वत्स ने अदालत में पक्ष रखा। हाई कोर्ट से राहत पाने वालों में सौरभ सिंह, अवधेश कुमार, दीप माला और सोनम कुमारी शामिल हैं। अदालत के आदेश से उन अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है, जिनका चयन JPSC की संबंधित प्रक्रियाओं के जरिए हुआ था।
अनियमितताओं के आरोपों के बाद लिया गया था फैसला
दरअसल, JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं और नियुक्तियों में कथित अनियमितताओं को लेकर झारखंड में लंबे समय से विवाद चल रहा था। रांची में छात्रों ने कई सप्ताह तक प्रदर्शन भी किया था। इन आरोपों के बीच राज्य सरकार ने कई परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का निर्णय लिया था।
सरकार की ओर से परीक्षा प्रक्रिया में सुधार और कदाचार पर रोक लगाने के लिए कई कदम उठाने की बात कही गई थी। इनमें हाई कोर्ट से कदाचार से जुड़े मामलों की जांच के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट गठित करने का अनुरोध, दोनों आयोगों में आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ बनाना और परीक्षा सुधार के लिए कमेटी का गठन शामिल था। इस कमेटी को दो महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया था।
SIT और CID जांच के तथ्यों का भी दिया गया हवाला
सरकार के फैसले में कुछ परीक्षाओं को SIT और CID जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर रद्द किया गया था। खास तौर पर CGL परीक्षा के संबंध में जांच में सामने आए तथ्यों को आधार बनाया गया। सरकार का तर्क था कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आई अनियमितताओं और कदाचार की शिकायतों को देखते हुए निष्पक्षता बनाए रखने के लिए संबंधित परीक्षाओं और नियुक्तियों की समीक्षा जरूरी है।
हालांकि, चयनित अभ्यर्थियों ने सरकार के इस फैसले को चुनौती देते हुए कहा कि केवल व्यापक आरोपों या जांच के आधार पर पूरी चयन प्रक्रिया और नियुक्तियों को रद्द करने से उन अभ्यर्थियों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं, जिन्होंने निर्धारित प्रक्रिया के तहत परीक्षा पास की और नियुक्ति हासिल की।
कई बड़ी परीक्षाएं सरकार के फैसले के दायरे में
सरकार के रद्दीकरण के फैसले में JPSC की बड़ी संख्या में परीक्षाएं और भर्तियां शामिल थीं। इनमें झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2025, संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2023, सिविल जज भर्ती, सहायक वन संरक्षक, फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, ड्रग इंस्पेक्टर, सहायक लोक अभियोजक, फूड सेफ्टी ऑफिसर और विभिन्न तकनीकी एवं शैक्षणिक पदों की भर्तियां शामिल हैं।
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इसके अलावा पुरानी भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़ी कुछ परीक्षाएं भी फैसले के दायरे में थीं। इनमें 5वीं संयुक्त सिविल सेवा भर्ती, संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा-2016 और 2021, सिविल जज की विभिन्न भर्तियां, डेंटल डॉक्टर भर्ती, जियोलॉजिस्ट एवं केमिस्ट भर्ती और संयुक्त सहायक अभियंता भर्ती जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं।
आगे क्या होगा?
हाई कोर्ट की अंतरिम राहत के बाद अब सरकार के आदेश पर तत्काल प्रभाव से रोक बनी रहेगी, जबकि मामले में आगे की न्यायिक कार्यवाही जारी रहेगी। अदालत आगे यह तय करेगी कि सरकार द्वारा परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला कानूनी रूप से उचित था या नहीं। फिलहाल हाई कोर्ट के आदेश से याचिका दायर करने वाले नवनियुक्त अधिकारियों और चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, अंतिम स्थिति अदालत में होने वाली आगे की सुनवाई और विस्तृत आदेश पर निर्भर करेगी।
Written By: Geeta Sharma