विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर जारी विरोध के बीच केंद्र सरकार ने इसे संयुक्त संसदीय समिति (JPC) को भेजने का फैसला किया है। सूत्रों के मुताबिक,सरकार ने इस संबंध में कदम उठाने का निर्णय लिया है। इससे पहले राज्यसभा की बिजनेस एडवाइजरी कमेटी (BAC) की बैठक में कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सरकार से FCRA बिल वापस लेने की मांग की थी।

FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों के साथ-साथ ईसाई समुदाय के विभिन्न संगठनों की ओर से भी लगातार आपत्ति जताई जा रही है। विरोध करने वालों का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का असर चर्चों, धार्मिक संस्थाओं और सामाजिक कल्याण से जुड़े संगठनों की गतिविधियों पर पड़ सकता है।

तमिलनाडु विधानसभा ने पारित किया प्रस्ताव

FCRA बिल के खिलाफ तमिलनाडु विधानसभा ने भी प्रस्ताव पारित किया है। जानकारी के अनुसार,प्रस्ताव में केंद्र सरकार से विधेयक को वापस लेने का आग्रह किया गया है।प्रस्ताव में आशंका जताई गई कि संशोधन से परमार्थ संगठनों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर अल्पसंख्यक समुदायों द्वारा संचालित शैक्षणिक और समाज कल्याण संस्थानों के कामकाज पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जाहिर की गई। प्रस्ताव पर चर्चा के बाद इसे ध्वनि मत से पारित किया गया।

मिजोरम में हजारों लोगों ने निकाली रैली

मिजोरम की राजधानी आइजोल में भी FCRA संशोधन के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध देखने को मिला। अलग-अलग ईसाई समुदायों से जुड़े हजारों लोगों ने विधेयक के विरोध में रैली निकाली। इसका आयोजन काउंसिल ऑफ चर्चेज इन मिजोरम (CCM) के आह्वान पर किया गया था। CCM में राज्य के नौ प्रमुख चर्च शामिल हैं। इनमें प्रेस्बिटेरियन चर्च ऑफ इंडिया और बैपटिस्ट चर्च ऑफ मिजोरम जैसे प्रमुख चर्च भी शामिल हैं।

नागालैंड के CM ने अमित शाह को लिखा पत्र

नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो ने भी केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर FCRA में प्रस्तावित बदलावों पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया है। रियो ने चिंता जताई कि नए प्रावधानों से चर्चों और ईसाई धर्मार्थ संगठनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि इसका असर शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यक्रमों पर भी पड़ने की आशंका है। मुख्यमंत्री ने विधेयक को विस्तृत जांच के लिए संसदीय समिति के पास भेजने और संबंधित हितधारकों को अपनी राय रखने का अवसर देने की मांग की।

नए नियमों को लेकर भी उठे सवाल

इस साल जून में केंद्र सरकार ने विदेशी धन प्राप्त करने से जुड़े FCRA नियमों में संशोधन की अधिसूचना जारी की थी। इसके तहत NGOs के लिए पहले से निर्धारित उद्देश्यों और कार्यक्षेत्रों में से किसी एक का चयन करना अनिवार्य किया गया।

हालांकि संशोधित नियमों में धार्मिक आस्था से जुड़ी कई गतिविधियों की अनुमति है, लेकिन FCRA पंजीकरण के लिए पात्र कुछ श्रेणियों में धर्म-प्रचार को बाहर रखा गया है। इसी प्रावधान को लेकर ईसाई संगठनों के बीच विशेष चिंता देखी जा रही है।

फिलहाल टला बिल को पास कराने का प्लान

FCRA अमेंडमेंट बिल, 2026 को 25 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। मौजूदा मानसून सत्र में इस पर चर्चा होने की उम्मीद थी, लेकिन विपक्ष के विरोध और हंगामे के कारण संसद में अपेक्षित विधायी कामकाज नहीं हो पाया।

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अब सरकार द्वारा बिल को JPC के पास भेजने का फैसला इस पूरे विवाद को संसदीय जांच के दायरे में लाता है। समिति में विधेयक के प्रावधानों पर विस्तार से विचार किए जाने और विभिन्न हितधारकों की राय लिए जाने की संभावना है। इससे सरकार को विपक्ष और संबंधित समुदायों की आपत्तियों पर चर्चा करने का अवसर भी मिलेगा।

Written By: Geeta Sharma