अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ( Marco Rubio) आज यानी शनिवार सुबह अपने चार दिवसीय भारत दौरे पर कोलकाता पहुंचे। एयरपोर्ट पर विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। विदेश मंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पिछले कुछ महीनों से तनावपूर्ण चल रहे भारत-अमेरिका संबंधों को नई मजबूती देना माना जा रहा है।
एस जयशंकर और मार्को रुबियो के बीच होगी कई अहम मुद्दों पर चर्चा
इस दौरान भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर (S. Jaishankar) और मार्को रुबियो के बीच कई अहम मुद्दों पर चर्चा होगी। बातचीत में ऊर्जा सहयोग, व्यापार, निवेश, आधुनिक तकनीक और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। इसके अलावा पश्चिम एशिया में जारी तनाव और उसके वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा ऊर्जा आपूर्ति पर पड़ने वाले असर पर भी विचार-विमर्श होने की संभावना है।
दौरे से पहले मार्को ने कही थी ये बात
भारत दौरे से पहले मार्को रुबियो ने कहा कि अमेरिका भारत के साथ ऊर्जा संबंधों को और मजबूत करना चाहता है, उन्होंने भारत को अमेरिका का महत्वपूर्ण सहयोगी बताते हुए कहा कि अमेरिका भारत को उसकी जरूरत के अनुसार अधिक ऊर्जा निर्यात करने के लिए तैयार है। उन्होंने यह भी कहा कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए क्वाड साझेदारी को और मजबूत किया जाएगा।
पीएम मोदी से करेंगे मुलाकात
विदेश मंत्रालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, रुबियो आज यानी शनिवार सुबह कोलकाता पहुंचे और दोपहर में नई दिल्ली रवाना होंगे। दिल्ली में उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) से होगी। अगले दिन हैदराबाद हाउस में उनकी और डॉ. एस. जयशंकर की द्विपक्षीय बैठक आयोजित की जाएगी।
दूतावास में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में रुबियो होंगे शामिल
दौरे के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री अमेरिकी दूतावास में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी शामिल होंगे। इसके बाद वह आगरा और जयपुर के कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। दौरे के अंतिम दिन नई दिल्ली में आयोजित क्वाड विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेंगे, जहां भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रतिनिधि शामिल होंगे। बैठक के बाद संयुक्त प्रेस बयान भी जारी किया जाएगा। वहीं, अमेरिकी दूतावास ने कहा है कि मार्को रुबियो की यह यात्रा क्वाड साझेदारी की बढ़ती अहमियत को दर्शाती है। क्वाड समूह में भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं, जिसका उद्देश्य इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सहयोग को बढ़ावा देना है।
Written By Toshi Shah