पेपर लीक और प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र सरकार के खिलाफ अपना विरोध तेज कर दिया है। संसद के मॉनसून सत्र के दूसरे दिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने संसद परिसर से प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाला और शिक्षा व्यवस्था में सुधार तथा केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर धरने पर बैठ गए। इस प्रदर्शन में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और सांसद शामिल रहे। कांग्रेस का आरोप है कि लगातार हो रहे पेपर लीक से देश के करोड़ों युवाओं का भविष्य प्रभावित हुआ है। लेकिन सरकार इस गंभीर मुद्दे पर जवाबदेही तय करने से बच रही है।

राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

धरने से पहले राहुल गांधी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा कि विपक्ष युवाओं के साथ हुई कथित अन्यायपूर्ण घटनाओं पर जवाब मांगने के लिए प्रधानमंत्री आवास तक मार्च कर रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार न तो इस मामले की जिम्मेदारी स्वीकार करना चाहती है और न ही संसद में इस पर गंभीर चर्चा के लिए तैयार है।


मीडिया से बातचीत में राहुल गांधी ने कहा कि देश के छात्र यह महसूस कर रहे हैं कि उनका भविष्य अंधकार में है, जबकि सरकार के मंत्री केवल अपनी कुर्सी बचाने में लगे हुए हैं। उन्होंने कहा कि जिस देश में छात्रों का भविष्य दांव पर लगा हो और मंत्री अपनी जिम्मेदारी से बचते रहें, वहां न्याय की उम्मीद करना मुश्किल है। राहुल ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद के दोनों सदनों में इस मुद्दे पर अपनी बात रखनी चाहिए और सरकार को जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।

प्रतियोगी परीक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि देश की प्रतियोगी परीक्षा प्रणाली लगातार कमजोर होती जा रही है। उनके अनुसार पहले युवाओं के लिए प्रतियोगी परीक्षाएं रोजगार और बेहतर भविष्य का प्रमुख माध्यम थीं, लेकिन लगातार सामने आ रहे पेपर लीक और परीक्षा संबंधी विवादों ने इस व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कम कर दिया है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के सामने रोजगार के अवसर सीमित होते जा रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस का कहना है कि छात्रों की नाराजगी केवल परीक्षा प्रक्रिया तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उनके भविष्य और रोजगार की संभावनाओं से भी जुड़ी हुई है।

शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर आरोप

धरने के दौरान राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि देश की शिक्षा व्यवस्था पर कुछ बड़े कारोबारी समूहों और एक विशेष संस्था का प्रभाव बढ़ गया है, जिससे आम छात्रों के हित प्रभावित हो रहे हैं। उनके मुताबिक, पूरे देश के छात्र यह महसूस कर रहे हैं कि उनकी आवाज सुनी नहीं जा रही और उनके भविष्य को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।

कांग्रेस नेताओं का कहना है कि सरकार को शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता सुनिश्चित करनी चाहिए, परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना चाहिए और पेपर लीक जैसे मामलों में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। पार्टी का दावा है कि युवाओं के भविष्य से जुड़े इस मुद्दे पर व्यापक बहस और जवाबदेही की आवश्यकता है।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई

विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सांकेतिक रूप से अपने हाथों में हथकड़ियां पहनकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। धरना स्थल पर पुलिस और प्रदर्शनकारी नेताओं के बीच बातचीत भी हुई। इस दौरान कांग्रेस के कई नेताओं, जिनमें सुखजिंदर सिंह रंधावा और चरणजीत सिंह चन्नी शामिल थे, को पुलिस ने हिरासत में लिया।

पुलिस ने धरना स्थल के पास कई बसें भी तैनात कीं और प्रदर्शन समाप्त करने की अपील की। माना जा रहा था कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अन्य प्रदर्शनकारी नेताओं को भी हिरासत में लिया जा सकता है। हालांकि कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए अपना विरोध जारी रखने की बात कही।

'कांग्रेस छात्रों के हितों की आवाज उठाती रहेगी'

कांग्रेस का कहना है कि वह संसद से लेकर सड़क तक छात्रों के हितों की आवाज उठाती रहेगी और पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही तय होने तक अपना संघर्ष जारी रखेगी। वहीं सरकार की ओर से इस मुद्दे पर विपक्ष के आरोपों का जवाब दिए जाने और आगे की रणनीति पर सभी की नजर बनी हुई है।

Written By: Geeta Sharma