लगभग चार महीने तक चले तनाव और संघर्ष के बाद अमेरिका और ईरान के बीच एक महत्वपूर्ण समझौता हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान (Masoud Pezeshkian) ने बीते दिन यानी 17 जून को एक समझौता ज्ञापन (MOU) पर औपचारिक हस्ताक्षर कर दिए, जिसके साथ ही यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया।
राष्ट्रपति ट्रंप ने जी 7 के दौरान किया हस्ताक्षर
अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रपति ट्रंप ने फ्रांस में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान समझौते की हार्ड कॉपी पर भी हस्ताक्षर किए। इससे पहले अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाक़र क़ालीबाफ़ (Mohammad Baqer Qalibaf) ने रविवार को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर किए थे। समझौते का उद्देश्य दोनों देशों के बीच जारी सैन्य टकराव को समाप्त करना, क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करना और आगे की वार्ताओं के लिए आधार तैयार करना है। दस्तावेज़ में तत्काल युद्धविराम, एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान तथा 60 दिनों के भीतर व्यापक अंतिम समझौते पर बातचीत जारी रखने की प्रतिबद्धता शामिल है।
शुक्रवार को Geneva में होगी दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक
हालांकि समझौते पर हस्ताक्षर हो चुके हैं, फिर भी दोनों देशों के अधिकारियों की बैठक शुक्रवार को Geneva में प्रस्तावित है। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस बैठक का उद्देश्य नए हस्ताक्षर नहीं, बल्कि समझौते के क्रियान्वयन और आगे की वार्ताओं पर चर्चा करना है।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कही ये बात
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई (Esmail Baghaei) ने कहा कि ईरान को बिना परिवहन या बीमा संबंधी प्रतिबंधों के अपना तेल बेचने की अनुमति मिलनी चाहिए और उससे होने वाली आय तक उसकी पूर्ण पहुंच सुनिश्चित की जानी चाहिए। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिका ने ईरान की जमी हुई संपत्तियों तक पहुंच बहाल करने में सहयोग का आश्वासन दिया है।
अगले 60 दिनों तक दोनों पक्ष बरतेंगे संयम
समझौते के तहत अगले 60 दिनों तक दोनों पक्ष संयम बरतेंगे और ऐसे किसी राजनीतिक, आर्थिक या सैन्य कदम से बचेंगे जो समझौते के कार्यान्वयन को प्रभावित कर सकता हो। इसी अवधि में व्यापक और स्थायी समझौते की दिशा में वार्ता आगे बढ़ेगी। यह समझौता मध्य पूर्व में तनाव कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक पहल माना जा रहा है, हालांकि कई संवेदनशील मुद्दों पर अंतिम सहमति अभी शेष है।
Written By Toshi Shah