पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में आदिवासी छात्रों ने अपनी लंबे समय से लंबित विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी है। यह अनशन पुणे के मंजरी क्षेत्र स्थित आदिवासी छात्रावास में किया जा रहा है। बड़ी संख्या में छात्र भी इसके समर्थन में धरने पर बैठे हैं।
आदिवासी छात्रों की समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन
प्रदर्शन में शामिल कुछ छात्रों की तबीयत बिगड़ने की भी खबर है। सरकार का ध्यान आदिवासी छात्रों की शैक्षणिक, सामाजिक और अन्य समस्याओं की ओर आकर्षित करने के लिए यह आंदोलन 13 अगस्त को शुरू किया गया था।
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांगों में 5 अगस्त को जारी सरकारी शासनादेश (GR) को तत्काल वापस लेना शामिल है। छात्रों का दावा है कि यह शासनादेश अनुचित है और आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले छात्रों पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
सांप के काटने से मृत तीन छात्राओं के परिवारों को मुआवजे की मांग
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग है कि गडचिरोली के एक आदिवासी आवासीय विद्यालय में सांप के काटने से जान गंवाने वाली तीन छात्राओं के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।
इसके अलावा, प्रदर्शनकारियों ने घटना के लिए कथित रूप से जिम्मेदार प्रशासनिक और राजनीतिक अधिकारियों के खिलाफ गैर इरादतन हत्या (culpable homicide) के आपराधिक मामले दर्ज करने की मांग की है।
छात्रों ने आदिवासी छात्रावासों में रहने वाले और आदिवासी आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले हर छात्र को 10 करोड़ रुपये का बीमा कवर देने की भी मांग की है।
12,500 आदिवासी पदों पर भर्ती की मांग
प्रदर्शनकारियों ने राज्य में 12,500 आदिवासी पदों की लंबित भर्ती प्रक्रिया और अन्य आदिवासी भर्ती रिक्तियों को तत्काल लागू करने की मांग की है।
उन्होंने सेवा से हटाए गए PESA कर्मचारियों को बहाल कर स्थायी नियुक्ति देने की भी मांग की है। साथ ही भर्ती विज्ञापनों में PESA अधिनियम को सख्ती से लागू करने की मांग उठाई गई है।
प्रदर्शनकारियों ने रक्त संबंधों के आधार पर जाति वैधता प्रमाणपत्र से जुड़े दोनों सरकारी शासनादेशों और बंजारा अध्ययन समिति को तत्काल रद्द करने की भी मांग की है।
आदिवासी छात्रों को पर्याप्त शैक्षणिक सुविधाओं की मांग
प्रदर्शनकारी छात्र अक्षय घोडे ने कहा कि आदिवासी छात्रों को पर्याप्त शैक्षणिक सुविधाएं और जरूरी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए तथा आदिवासी समुदाय से जुड़े सभी लंबित मुद्दों का तत्काल समाधान होना चाहिए।
घोडे ने कहा कि सरकार को छात्रों की मांगों को तुरंत स्वीकार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो छात्राएं भी आंदोलन में शामिल होंगी।
उन्होंने आगे कहा कि यदि सरकार मौजूदा आंदोलन का समाधान नहीं निकालती और स्थिति बिगड़ती है, तो इसके लिए पूरी तरह सरकार जिम्मेदार होगी।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
इस प्रदर्शन में आदिवासी समुदाय के छात्र, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हुए। प्रदर्शन स्थल पर विभिन्न सामाजिक सुधारकों और प्रमुख व्यक्तित्वों की तस्वीरें भी लगाई गईं। प्रदर्शनकारियों ने आदिवासी समुदाय के अधिकारों और कल्याण के लिए अपना संघर्ष जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया।
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Written By: Pradeep Singh