Khandwa News: मध्य प्रदेश के खंडवा में मंगलवार को कलेक्ट्रेट की जनसुनवाई के दौरान उस वक्त लोगों का ध्यान एक युवक ने खींच लिया, जब वह कुत्ते की कॉस्ट्यूम पहनकर वहां पहुंचा। यह कोई मनोरंजन का कार्यक्रम नहीं था, बल्कि शहर में बढ़ते आवारा कुत्तों के आतंक के खिलाफ किया गया एक अनोखा विरोध प्रदर्शन था।

नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष मुल्लू राठौर इस युवक को अपने साथ लेकर जनसुनवाई में पहुंचे। उनका कहना है कि शहर में आवारा कुत्तों की संख्या लगातार बढ़ रही है और डॉग बाइट के मामले लोगों के लिए गंभीर चिंता बन चुके हैं।

कुत्ते की ड्रेस में युवक को देखकर जुटी भीड़

हर सप्ताह होने वाली जनसुनवाई में मंगलवार को भी बड़ी संख्या में लोग अपनी शिकायतें लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान कुत्ते की ड्रेस पहने युवक को देखकर परिसर में मौजूद लोगों की नजर उस पर टिक गई।कई लोग अपनी समस्याओं से ज्यादा इस अनोखे प्रदर्शन को देखने में दिलचस्पी लेने लगे। लोगों ने युवक की तस्वीरें खींचीं और वीडियो भी बनाए। नेता प्रतिपक्ष का कहना था कि उनका मकसद इसी अनोखे तरीके से प्रशासन का ध्यान शहर में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या की ओर खींचना था।

नसबंदी के नाम पर 33 लाख रुपये खर्च करने का दावा

मुल्लू राठौर ने नगर निगम की श्वान नसबंदी योजना पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने निगम के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया कि 2024 में 3,168 कुत्तों की नसबंदी कराए जाने की बात कही गई थी।इसके लिए निगम के खजाने से करीब 33 लाख 20 हजार रुपये खर्च किए गए। नेता प्रतिपक्ष के मुताबिक, इस हिसाब से एक कुत्ते की नसबंदी पर औसतन करीब 1,048 रुपये खर्च दिखाया गया।उनका सवाल है कि अगर इतने बड़े स्तर पर नसबंदी अभियान वास्तव में हुआ, तो शहर के अलग-अलग इलाकों में आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय बढ़ती क्यों नजर आ रही है?

‘कागजों में हो रही नसबंदी’, लगाए गंभीर आरोप

विपक्ष नेता ने आरोप लगाया कि नसबंदी अभियान में सिर्फ कागजी आंकड़े तैयार किए गए और सरकारी धन के इस्तेमाल में गड़बड़ी हुई। उन्होंने पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए कहा कि नसबंदी किए गए कुत्तों की वास्तविक संख्या का मौके पर जाकर सत्यापन कराया जाना चाहिए।साथ ही उन्होंने संबंधित कंपनी की पात्रता, टेंडर प्रक्रिया और जमा किए गए दस्तावेजों की भी जांच की मांग की है।

चार साल में 13,225 लोगों के डॉग बाइट का दावा

अपर कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में मुल्लू राठौर ने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में करीब 13,225 लोग कुत्तों के काटने के बाद अस्पताल पहुंचे,उनका कहना है कि आवारा कुत्तों की समस्या का सबसे ज्यादा असर बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों पर पड़ रहा है। रात के समय सड़कों पर घूमने वाले आवारा कुत्तों के कारण लोगों में डर का माहौल है।उन्होंने यह भी कहा कि शहर में सिर्फ आवारा कुत्ते ही नहीं, बल्कि बेसहारा मवेशी भी सड़क पर घूमते हैं और कई बार हादसों की वजह बनते हैं।

ऑडिट से लेकर FIR तक की मांग

नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। इनमें श्वान नसबंदी योजना में खर्च हुए पैसे का तकनीकी और वित्तीय ऑडिट, टेंडर प्रक्रिया की जांच और संबंधित कंपनी की पात्रता की पड़ताल शामिल है।इसके अलावा नसबंदी किए गए कुत्तों की वास्तविक संख्या और उनकी पहचान का भौतिक सत्यापन कराने की भी मांग की गई है।उन्होंने नियमों के विपरीत काम कराने वाले अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ FIR और कानूनी कार्रवाई की मांग भी की है।

Written By: Shivashakti Narayan Singh