Kejriwal News: आप संयोजक अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली हाईकोर्ट में पेश नहीं होंगे। दरअसल, केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता की कोर्ट का बहिष्कार करने का बड़ा फैसला किया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जस्टिस स्वर्णकांता जो भी फैसला देंगी वे उसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। इसके संबंध में जस्टिस स्वर्णकांता को उन्होंने एक पत्र भी लिखा है।
जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की टूट चुकी है: केजरीवाल
केजरीवाल ने आगे कहा कि वह जस्टिस स्वर्णकांता के सामने खुद या फिर वकील के जरिए पेश नहीं होंगे। उनका ऐसा मानना है कि जस्टिस स्वर्णकांता से न्याय मिलने की उनकी उम्मीद टूट चुकी है।
#WATCH | AAP National Convenor Arvind Kejriwal releases a video, he says, "My hope of receiving justice from Justice Swarnkanta Sharma Ji has been shattered. Listening to the voice of my conscience, adhering to the principles of Gandhi Ji, and with the spirit of Satyagraha, I… pic.twitter.com/jOTxvyfOHd
— ANI (@ANI) April 27, 2026
मैंने गांधी जी के सत्याग्रह पर चलने का फैसला किया है। अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनते हुए यह फैसला लिया है। केजरीवाल का कहना है कि जस्टिस स्वर्णकांता अब जो भी फैसला देंगी उस फैसले की अपील में मैं सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार रखूंगा।
केजरीवाल ने न्यायाधीश के खिलाफ उठाई थी आपत्ति
गौरतलब है कि अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति मामले में अपनी रिहाई के खिलाफ CBI की याचिका की सुनवाई कर रही न्यायाधीश के खिलाफ कई आपत्तियां उठाई थीं। क्योंकि पहले उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका पर उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था।
In all humility and with complete respect for judiciary, I have written the following letter to Justice Swarna Kanta Sharma, informing her that pursuing Gandhian principles of Satyagraha, it won’t be possible for me to pursue this case in her court, either in person or through a… pic.twitter.com/HmyOyNYug8
— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) April 27, 2026
साथ ही मनीष सिसोदिया समेत अन्य आरोपियों की जमानत याचिकाओं पर राहत देने से भी इनकार कर दिया था। वहीं केजरीवाल के अलावा, मनीष सिसोदिया और दुर्गेश पाठक ने भी जस्टिस स्वर्णकांता को इस मामले से दूर करने के लिए आवेदन दिए थे।
जस्टिस स्वर्णकांता ने क्या कहा?
वहीं इस मामले पर जस्टिस स्वर्णकांता ने आबकारी नीति मामले की सुनवाई से खुद को अलग करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही आप संयोजक अरविंद केजरीवाल और अन्य लोगों की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया। बताया जाता है कि लगभग एक घंटे से अधिक समय की सुनवाई में जस्टिस शर्मा ने कहा था कि किसी भी वादी को बिना किसी सबूत के न्यायाधीश पर फैसला करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। न्यायाधीश किसी वादी के पूर्वाग्रह के निराधार डर को दूर करने के लिए खुद को मामले से अलग नहीं कर सकते हैं।
Written By: Geeta Sharma