Jharkhand News: छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में से एक देवेंद्र नाथ महतो ने स्वतंत्रता दिवस के दिन पुलिस पर उनके साथ धक्का-मुक्की करने और उनके साथियों के साथ मारपीट का आरोप लगाया। महतो के मुताबिक, वह सदर अस्पताल में इलाजरत होने के बावजूद छात्रों द्वारा आयोजित तिरंगा यात्रा में शामिल होने के लिए बाहर निकलना चाहते थे, लेकिन पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें अस्पताल परिसर में महतो और पुलिसकर्मियों के बीच बहस होती दिखाई देती है।

महतो ने सोशल मीडिया शेयर किया पोस्ट

महतो ने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भी उन्हें शांतिपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने से रोका गया। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में हिस्सा लेने की स्वतंत्रता नहीं है, तो स्वतंत्रता दिवस के मायने क्या रह जाते हैं।

तिरंगा यात्रा में शामिल नहीं हो सके महतो

15 अगस्त को छात्रों ने रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम से अल्बर्ट एक्का चौक तक तिरंगा यात्रा निकाली। बड़ी संख्या में छात्रों ने हाथों में राष्ट्रीय ध्वज लेकर भारत माता की जय और वंदे मातरम के नारे लगाए। यह यात्रा आंदोलन के 22वें दिन आयोजित की गई थी।

हालांकि, अस्पताल में भर्ती होने के कारण महतो स्वयं इसमें शामिल नहीं हो सके। महतो ने अपने साथ हुई कथित कार्रवाई को स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ते हुए भगत सिंह, नेताजी सुभाष चंद्र बोस, खुदीराम बोस, महात्मा गांधी और डॉ. भीमराव आंबेडकर के संघर्ष का उल्लेख किया। उन्होंने पूछा कि क्या लोगों को अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण आवाज उठाने की स्वतंत्रता भी नहीं है।

भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग

महतो का विरोध प्रदर्शन झारखंड की भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चल रहे आंदोलन का हिस्सा है। छात्र JPSC और JSSC की विभिन्न परीक्षाओं की प्रक्रिया में पारदर्शिता, कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों के बीच 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा सहित कुछ परीक्षाओं को रद्द करने और मामले की CBI जांच कराने की मांग भी प्रमुख रही है।

महतो ने 2 अगस्त से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी। आंदोलन के दौरान उनकी तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें रांची के सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया। इससे पहले विधानसभा की ओर बढ़ रहे छात्रों और पुलिस के बीच तनाव बढ़ा था, जिसके दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया था। अधिकारियों के अनुसार, उस टकराव में कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

राजनीतिक बहस भी तेज

अस्पताल से महतो को बाहर जाने से रोकने की घटना ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया है। उनके समर्थकों का सवाल है कि उन्हें स्वतंत्रता दिवस के शांतिपूर्ण कार्यक्रम में शामिल होने से क्यों रोका गया। दूसरी ओर, कुछ नेताओं ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल से बाहर नहीं जाने देने के फैसले का बचाव किया है।

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अभी तक महतो के आरोपों पर कोई पुष्टी नहीं हुई है

फिलहाल, महतो द्वारा लगाए गए धक्का-मुक्की और साथियों की पिटाई के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और अस्पताल में हुई इस विशेष घटना पर पुलिस का विस्तृत पक्ष तत्काल सामने नहीं आया था। ऐसे में विवाद का केंद्र केवल पुलिस कार्रवाई नहीं, बल्कि छात्रों की भर्ती संबंधी मांगों और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार के बीच संतुलन का सवाल भी बन गया है। छात्र आंदोलन जारी रहने के बीच सरकार की ओर से भर्ती प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया गया है।

Written By: Geeta Sharma