तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने सोमवार को कहा कि 14-सूत्रीय समझौते (MoU) में तय 60 दिनों की बातचीत की अवधि अब प्रासंगिक नहीं रह गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि समझौते पर हस्ताक्षर के कुछ ही हफ्तों बाद अमेरिका ने इसके प्रावधानों का "गंभीर और व्यापक उल्लंघन" किया।

60 दिन की समय-सीमा खत्म

ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के अनुसार, बघाई ने 60 दिन की समय-सीमा खत्म होने, सुरक्षा खतरों से निपटने की ईरान की रणनीति और पड़ोसी देशों के साथ संबंध मजबूत करने के प्रयासों पर पूछे गए सवाल के जवाब में यह बयान दिया।

बघाई ने कहा कि समझौते के दस्तावेज में कोई निश्चित 60 दिन की समय सीमा नहीं थी। उन्होंने कहा कि ईरान अपनी नीतियां बाहरी दबाव, चेतावनी या किसी तय समय सीमा के आधार पर नहीं बनाता, बल्कि राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर फैसले करता है।

उन्होंने कहा, "इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ऐसा देश नहीं है जो दबाव, अल्टीमेटम या समय सीमा के आधार पर अपनी नीतियां बदलता है। हम अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा के मूल्यांकन के आधार पर फैसले लेते हैं।"

अमेरिका में किया समझौते का उल्लंघन

ईरानी अधिकारी के मुताबिक, 14-सूत्रीय MoU में दो प्रमुख मुद्दों पर 60 दिनों तक चर्चा का प्रावधान था- प्रतिबंध हटाना और परमाणु मुद्दा। अगर इस अवधि में कोई निष्कर्ष नहीं निकलता तो बातचीत को आगे बढ़ाने की बात कही गई थी।

बघाई ने आरोप लगाया कि 18 जून को समझौते पर हस्ताक्षर होने के कुछ ही हफ्तों बाद अमेरिका ने इसके नियमों का उल्लंघन कर दिया, जिसके कारण बातचीत शुरू ही नहीं हो सकी। उन्होंने कहा, "अमेरिका द्वारा समझौते का गंभीर उल्लंघन किए जाने के बाद 60 दिन की बातचीत का मुद्दा अब समाप्त हो चुका है।"

ईरान का अपने आंतरिक मामलों को संभालने पर ध्यान

ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि फिलहाल उनका देश अपने आंतरिक मामलों को संभालने पर ध्यान दे रहा है और उसकी सेना सुरक्षा हालात पर पूरी नजर बनाए हुए है। उन्होंने कहा, "हम देश के मामलों को चलाने पर केंद्रित हैं और हमारी सशस्त्र सेनाएं हर गतिविधि पर पूरी सतर्कता के साथ नजर रख रही हैं।"

पड़ोसी देशों के साथ कूटनीतिक संबंधों को लेकर बघाई ने कहा कि अन्य देशों के साथ संबंध मजबूत करना विदेश मंत्रालय की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि ईरान क्षेत्रीय देशों और अन्य संबंधित पक्षों के साथ लगातार संपर्क में है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद गालिबाफ ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजरायल के नेतृत्व वाले कथित "अन्यायपूर्ण युद्ध" में ईरान सैन्य और राजनीतिक दोनों स्तरों पर विजयी रहा है।

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ईरानी सरकारी मीडिया प्रेस टीवी के अनुसार, गालिबाफ ने कहा कि ईरान ने इस संघर्ष में मजबूती से मुकाबला किया और अमेरिका-ईरान MoU कूटनीतिक मोर्चे पर ईरान की सफलता को मजबूत करने में मदद करेगा। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार दावा करते रहे हैं कि ईरान के सैन्य ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया गया है।

Written By : Pradeep Singh