राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने आज मध्य प्रदेश के बैतूल में प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित 'अध्यात्मिक जागृति द्वारा आदिवासी समाज का सशक्तीकरण' महासम्मेलन में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने आदिवासी समाज की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत की सराहना करते हुए कहा कि आधुनिक समय में आध्यात्मिक और मानवीय मूल्यों का महत्व पहले से कहीं अधिक बढ़ गया है।

समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए आध्यात्मिक जागरूकता आवश्यक:राष्ट्रपति

सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उपभोग की संस्कृति पर आधारित तेज़ी से बदलती दुनिया में समाज के प्रत्येक वर्ग के लिए आध्यात्मिक जागरूकता आवश्यक है। इसके माध्यम से समतामूलक आचरण,सामाजिक सद्भाव तथा प्राकृतिक संसाधनों के प्रति संवेदनशील जीवनशैली को बढ़ावा दिया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तनाव,संघर्ष और युद्ध से प्रभावित वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में अध्यात्म मानवता को शांति और संतुलन प्रदान करने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

आदिवासी जीवनशैली को बताया प्रकृति और अध्यात्म के निकट

राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि जनजातीय समुदाय की जीवनशैली स्वाभाविक रूप से अध्यात्म की मूल प्रेरणाओं के निकट होती है। प्रकृति और प्राकृतिक संसाधनों के साथ उनका गहरा जुड़ाव उन्हें जीवन मूल्यों की ओर प्रेरित करता है। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि ब्रह्माकुमारी संस्थान देश के विभिन्न क्षेत्रों में जनजातीय समाज के साथ मिलकर लंबे समय से महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है और उनके सर्वांगीण विकास में योगदान दे रहा है।

आर्थिक विकास के साथ आत्मविश्वास और जागरूकता भी आवश्यक

राष्ट्रपति ने कहा कि किसी भी समाज या वर्ग का सशक्तीकरण केवल आर्थिक उन्नति तक सीमित नहीं हो सकता। वास्तविक सशक्तीकरण तब संभव होता है जब व्यक्ति आत्मविश्वास, आत्मसम्मान और जागरूकता के साथ सामाजिक जिम्मेदारियों का निर्वहन करे। उन्होंने कहा कि आध्यात्मिक जागृति व्यक्ति को उसकी आंतरिक शक्तियों से परिचित कराती है तथा उसे सकारात्मक सोच और जीवन के उच्च उद्देश्यों से जोड़ती है।

2047 तक विकसित भारत के निर्माण का संकल्प

अपने संबोधन के अंत में राष्ट्रपति ने विकास और पारंपरिक मूल्यों के बीच संतुलन बनाए रखने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्थक विकास वही है जो हमारी सांस्कृतिक जड़ों और जीवन मूल्यों को मजबूत बनाए। उन्होंने सभी नागरिकों से वर्ष 2047 तक ऐसे विकसित भारत के निर्माण के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया, जहां अध्यात्म, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण और मानव कल्याण समावेशी विकास की मजबूत आधारशिला बनें।

(रिपोर्ट: एम.अतहर उद्दीन मुन्ने भारती) Edited By: Geeta Sharma