सना (यमन)। यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार को दावा किया कि उन्होंने लाल सागर में मोचा तट के पास सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के एक लैंडिंग शिप और उसके साथ चल रहे चार युद्धपोतों को निशाना बनाया है।

हूती सैन्य प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने टेलीग्राम पर जारी बयान में दावा किया कि इस हमले के लिए कई बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि हमला "सटीक और सीधा" था, जिसमें लैंडिंग शिप पूरी तरह नष्ट हो गया और कई अन्य जहाजों को नुकसान पहुंचा।

याह्या सारी ने दावा किया, "सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन के लैंडिंग शिप और चार साथ चल रहे युद्धपोतों को लाल सागर में मोचा के तट के पास निशाना बनाया गया। हमले में जहाज पूरी तरह नष्ट हो गया और कई युद्धपोत डूब गए, जबकि बाकी जहाजों में आग लग गई।"

हालांकि, इस हमले को लेकर सऊदी गठबंधन की ओर से तत्काल कोई पुष्टि नहीं की गई है।

सऊदी सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने का दावा

हूती प्रवक्ता ने कहा कि संगठन सऊदी अरब की सैन्य गतिविधियों और सैनिकों की तैनाती पर नजर रख रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि ऐसी किसी भी तैनाती को जमीन और समुद्र दोनों जगह निशाना बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि हूती समूह तथाकथित "नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी" की नीति पर कायम रहेगा और सऊदी सैन्य जमावड़े को निशाना बनाता रहेगा।

मारीब में हथियार डिपो पर ड्रोन हमले का दावा

याह्या सारी ने यह भी दावा किया कि हूती लड़ाकों ने यमन के मारीब प्रांत स्थित साहन अल-जिन कैंप में सऊदी सेना के एक हथियार भंडार को कई ड्रोन से निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि ड्रोन हमला सटीक था और इसके बाद हथियार डिपो में आग लग गई।

लाल सागर में बढ़ा तनाव

ईरान समर्थित हूती विद्रोही यमन के उत्तरी हिस्सों के बड़े क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते हैं। पिछले महीने उन्होंने लाल सागर और खासकर बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य के पास सऊदी अरब के खिलाफ नौसैनिक नाकाबंदी की घोषणा की थी। हूती समूह का आरोप है कि सऊदी अरब ने यमन पर नाकाबंदी लगा रखी है, जबकि रियाद इन आरोपों को खारिज करता रहा है।

यमन के विदेश मंत्रालय ने भी बयान जारी कर कहा कि सऊदी अरब द्वारा कथित रूप से अपने पुराने वादों से पीछे हटने और नाकाबंदी बढ़ाने के बाद यमन ने "नाकाबंदी के बदले नाकाबंदी" की नीति अपनाई।

मंत्रालय ने सऊदी सैन्य तैनाती को यमन की सुरक्षा और स्थिरता के लिए खतरा बताया और कहा कि यमनी सेना ने इसका जवाब दिया है। बयान में सऊदी अरब से यमन पर लगी कथित नाकाबंदी हटाने, सैन्य गतिविधियां रोकने और यमनी लोगों को अपने संसाधनों तक पहुंच देने की मांग की गई।

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यमन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि सबसे सुरक्षित और कम खर्चीला समाधान यही है कि सऊदी अरब यमन की मांगों को स्वीकार करे और यमन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप से दूर रहे।

Written By: Pradeep Singh