उत्तर प्रदेश में एक तरफ CM योगी आदित्यनाथ यूपी पुलिस के काम को काबिल-ए-तारीफ मानते है। तो वहीं दूसरी तरफ उनके ही गृह जनपद गोरखपुर में सरेआम बिजली विभाग के ठेकेदार शिवकुमार त्रिपाठी की तलवार से काटकर हत्या कर दी जाती है। मामले ने यूपी पुलिस की कानून व्यवस्था को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया। हत्याकांड की वजह भले ही साल 2024 की पुरानी रंजिश रही हो। लेकिन उसका इंतकाम साल 2026 में सरेआम तलवार और धारदार हथियारों से काटकर निर्मम हत्या कर देना पुलिस गश्त पर सीधा सवाल उठाता है। बता दें कि इस हत्याकांड के बाद खुद को घिरता हुआ देख पुलिस ने इसे गंभीरता से लिया और 8 अगस्त को हुए ठेकेदार शिवकुमार त्रिपाठी हत्याकांड में मुख्य आरोपी समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। साथ ही पुलिस खुद की अव्यवस्था को छिपाने की लीपा-पोती भी करने में जुटी है।

क्या बोले चश्मदीद

8 अगस्त 2026 को गोरखपुर के सिकरीगंज थाना क्षेत्र के एक गांव में छेदी चौधरी का ब्राह्मण भोज आयोजित हुआ था। जिसमें शामिल होने के लिए ठेकेदार शिवकुमार त्रिपाठी भी पहुंचे। शिवकुमार त्रिपाठी भोजन के लिए कतार में बैठे थे। तभी आरोपी पीछे से आए और तलवार, चाकू से हमला कर दिया। चश्मदीद लोगों ने जानकारी देते हुए बताया कि आरोपी यहीं नहीं रूके घायल शिवकुमार त्रिपाठी को अस्पताल ले जाया जा रहा था। तो हमलावर पीछा करते हुए वहां भी पहुंचे और रास्ते में ऑटो रोककर शिवकुमार त्रिपाठी को बाहर खींचा। आरोपियों ने शिवकुमार पर तलवार से वार कर उन्हें लहूलुहान कर दिया। वह आरोपियों से खुद को छोड़ने के लिए बोलते रहे। लेकिन आरोपी के सिर पर इस कदर खून सवार था कि उन्होंने तलवार से ताबड़तोड़ हमला कर शिवकुमार को मौत के घाट उतार दिया। इस पूरे हत्याकांड का वीडियो सोशल मीडिया पर आग तरह फैल गया। वायरल वीडियो में मुख्य आरोपी राहुल चौधरी तलवार हाथ में लिए ताबड़तोड़ हमला करते साफ दिखाई दे रहा है।

पुरानी रंजिश के तहत की गई हत्या

शिवकुमार त्रिपाठी हत्याकांड की मुख्य वजह साल 2024 में क्रिकेट को लेकर हुए विवाद में आदेश चौधरी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आदेश चौधरी की मौत के मामले में शिवकुमार त्रिपाठी मुख्य आरोपी थे। आदेश चौधरी की हत्या का बदला लेने के लिए छेदी चौधरी के पट्टीदार राहुल चौधरी और उसके भाई रोहित चौधरी ने साजिश के तहत शिवकुमार त्रिपाठी के हत्याकांड को अंजाम दिया। इस पूरे हत्याकांड में मृतक के वकील बेटे के दोस्त द्वारा बनाया गया वीडियो अहम भूमिका रखता है। मृतक के बेटे का दोस्त खुद वकील और बीजेपी से एक वार्ड के पार्षद है। ऐसे में जिले के अन्य वकील भी उनके साथ इस हत्याकांड का विरोध कर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठा रहे हैं। वकील दोस्त का कहना है कि पुलिस मुख्य सबूत इस वीडियो को ही जबरन डिलीट करवा रही है, जिससे उनकी नाकामी लोगों तक ना पहुंच सके। क्योंकि वायरल वीडियों के बाद लोगों की प्रतिक्रिया थी कि आरोपियों के घर पर बुलडोजर की कार्रवाई के साथ-साथ एनकाउंटर होना भी जरूरी है।


आखिर क्यों पुलिस डिलीट करवाना चाहती है वीडियो?

एसएसपी के मुताबिक वायरल वीडियो को डिलीट कराने के पीछे का असली मकसद महज यही है कि लोगों तक इस तरह की सामग्री न पहुंचे जिसे देखकर युवा, बच्चे और महिलाओं में डर का माहौल बने और समाज में किसी तरह का गलत संदेश ना जाए। इसके साथ ही शांति बनाए रखने के लिए भी इस वीडियो को डिलीट करना बेहद जरूरी है। फिलहाल पुलिस टीम जहां भी यह वीडियो वायरल हुआ है वहां से उसे डिलीट करने का काम जल्द से जल्द कर रहे हैं।


SSP ने बताया 8 लोगों को भेजा गया जेल

जिले के एसएसपी डॉक्टर कौस्तुभ ने कहा कि घटना में शामिल आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कार्रवाई की है। इस हत्याकांड में मुख्य आरोपी राहुल चौधरी समेत 8 लोगों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने आगे की कार्रवाई के लिए आरोपियों को जेल भेज दिया है। एसएसपी ने यह भी बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ एनएसए के तहत कार्रवाई की जा रही है। हत्याकांड में इस्तेमाल किया गया सरिया और तलवार बरामद कर लिया गया है। लापरवाही बरतने के मामले में थाना प्रभारी अंजुल चतुर्वेदी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।

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Written By: MADHVI TANWAR