Gorakhpur Railway Station News: गोरखपुर रेलवे स्टेशन पर 18 अगस्त को वैशाली एक्सप्रेस करीब 50 मिनट तक खड़ी रही। वजह कोई तकनीकी खराबी या सिग्नल की समस्या नहीं, बल्कि गार्ड के बैठने की कुर्सी थी। ड्यूटी पर पहुंचे गार्ड रामाशीष दास ने यार्ड यान में बैठने के लिए सही कुर्सी नहीं मिलने पर ट्रेन को आगे ले जाने से इनकार कर दिया।
मामला तब सुलझा जब गार्ड को बैठने के लिए एक छोटा स्टूल उपलब्ध कराया गया। इसके बाद ट्रेन आगे रवाना हुई और उन्होंने बरौनी तक अपनी ड्यूटी पूरी की।
टूटी कुर्सी देखकर गार्ड ने ट्रेन आगे बढ़ाने से किया इनकार
वैशाली एक्सप्रेस 18 अगस्त की सुबह करीब 9:47 बजे गोरखपुर स्टेशन पहुंची थी। गार्ड रामाशीष दास जब ट्रेन में पहुंचे तो उन्होंने देखा कि यार्ड यान में मौजूद कुर्सी खराब थी। उनका कहना था कि ऐसी स्थिति में ड्यूटी करना उनके लिए उचित नहीं है।उन्होंने स्टेशन प्रबंधन को अपनी परेशानी बताई और बैठने के लिए उचित व्यवस्था करने की मांग की। तत्काल समाधान नहीं मिलने पर उन्होंने ट्रेन को आगे ले जाने और सिग्नल देने से इनकार कर दिया। इसके बाद ट्रेन काफी देर तक स्टेशन पर खड़ी रही।बाद में उन्हें बैठने के लिए एक छोटा स्टूल दिया गया, जिसके बाद ट्रेन को आगे रवाना किया गया।
गार्ड ने क्यों लिया इतना बड़ा फैसला?
रामाशीष दास के मुताबिक, वह करीब आठ महीने बाद रिटायर होने वाले हैं। उनका कहना है कि ड्यूटी के दौरान उनके लिए सबसे अहम चीज यात्रियों और ट्रेन की सुरक्षा है।गार्ड को यह भी अंदाजा था कि ट्रेन के करीब 50 मिनट रुकने पर सवाल खड़े होंगे, लेकिन उनका तर्क था कि अगर बैठने की खराब व्यवस्था के बावजूद वह ट्रेन को रवाना कर देते और सफर के दौरान कोई समस्या होती, तो उसकी जिम्मेदारी भी उन्हीं पर आती।इसी वजह से उन्होंने अपनी शिकायत को नजरअंदाज करने के बजाय ट्रेन को आगे नहीं बढ़ाने का फैसला किया।
रेलवे ने गार्ड के फैसले को बताया गलत
रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित कुमार ने मामले पर अलग पक्ष रखा। उनके अनुसार वैशाली एक्सप्रेस ईस्ट सेंट्रल रेलवे की ट्रेन है और गोरखपुर में उसका ठहराव मुख्य रूप से परिचालन संबंधी कारणों से होता है।रेलवे का कहना है कि गार्ड यान में पहले से इनबिल्ट चेयर की व्यवस्था होती है। अलग से स्टूल उपलब्ध कराने का कोई प्रावधान नहीं है। रेलवे के मुताबिक ट्रेन के दिल्ली से रवाना होने के समय ऐसी किसी समस्या की जानकारी भी नहीं दी गई थी।अधिकारी ने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर गार्ड टूल बॉक्स पर बैठकर ड्यूटी करते हैं या खड़े होकर काम करते हैं। रेलवे का मानना है कि गार्ड को इस मुद्दे पर ट्रेन रोकने के बजाय निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना चाहिए था।
यात्रियों को हुई परेशानी, अब कार्रवाई की तैयारी
कुर्सी को लेकर शुरू हुआ विवाद करीब 50 मिनट तक ट्रेन रुकने की वजह बन गया। इससे ट्रेन में सवार यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।रेलवे ने गार्ड के इस कदम को गलत बताते हुए मामले में आधिकारिक कार्रवाई की बात कही है। वहीं, गार्ड का तर्क है कि उन्होंने अपनी ड्यूटी और सुरक्षा की जिम्मेदारी को ध्यान में रखते हुए फैसला लिया।
Written By: Shivashakti Narayan Singh