छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में कभी नक्सलवाद की राह पर चलने वाली महिलाओं ने अब अपनी जिंदगी को नई दिशा दे दी है। जिन हाथों में कभी हथियार हुआ करते थे, उन्हीं हाथों ने अब आत्मविश्वास और नई उम्मीद के साथ रैंप पर अपनी पहचान बनाई। रायपुर में आयोजित एक फैशन शो में इन पूर्व नक्सली महिलाओं ने हैंडलूम परिधानों में रैंप वॉक कर यह संदेश दिया कि अगर कोई व्यक्ति बदलाव का संकल्प ले ले, तो वह अपने अतीत को पीछे छोड़कर सम्मानजनक जीवन जी सकता है।

यह कार्यक्रम राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस के अवसर पर आयोजित किया गया, जहां आदिवासी संस्कृति और पारंपरिक हैंडलूम वस्त्रों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से विशेष फैशन शो का आयोजन किया गया था। इसमें आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौट चुकी महिलाओं ने पूरे आत्मविश्वास के साथ रैंप पर अपनी प्रस्तुति दी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियों की गड़गड़ाहट से उनका उत्साह बढ़ाया। यह आयोजन केवल फैशन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि समाज में पुनर्वास, आत्मनिर्भरता और नई शुरुआत का मजबूत संदेश भी बन गया।

इन महिलाओं की प्रस्तुति ने यह साबित कर दिया कि सही मार्गदर्शन, अवसर और दृढ़ इच्छाशक्ति के बल पर कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। कभी हिंसा और उग्रवाद से जुड़ी रहीं ये महिलाएं आज समाज के सामने सकारात्मक परिवर्तन का उदाहरण बनकर उभरी हैं।

इधर, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने नई दिल्ली में केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात की। बैठक के दौरान उन्होंने बस्तर क्षेत्र के तेजी से विकास के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न बुनियादी ढांचा योजनाओं में विशेष छूट और सहयोग देने का आग्रह किया।

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बैठक के बाद मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि दशकों तक नक्सलवाद की समस्या से जूझने के बाद अब बस्तर में शांति का माहौल है। ऐसे में क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए सड़क, पुल और अन्य बुनियादी सुविधाओं का विस्तार बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि करीब चार से पांच दशक तक उग्रवाद से प्रभावित रहने वाले बस्तर को अब तेज़ी से आगे बढ़ाने के लिए बेहतर कनेक्टिविटी सबसे बड़ी जरूरत है। इससे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और निवेश के नए अवसर भी पैदा होंगे।

पूर्व नक्सली महिलाओं का यह रैंप वॉक सिर्फ राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस का एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह इस बात का प्रतीक भी बन गया कि आत्मसमर्पण के बाद सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत संभव है। यह आयोजन समाज को यह संदेश देता है कि बदलाव की राह चुनने वालों को अवसर और सहयोग मिले, तो वे न केवल अपनी जिंदगी बदल सकते हैं, बल्कि दूसरों के लिए भी प्रेरणा बन सकते हैं।

Written by Rozi Sinha