पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के निवासी पाक सेना और सरकार के विरोध में लंबे समय से धरना-प्रदर्शन कर रहे है। पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की हिंसा के खिलाफ शनिवार को कुछ लोगों ने लाहौर प्रेस क्लब के बाहर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों के हाथों में प्लेकार्ड और पीओके के झंडे थे और वे नारे लगा रहे थे। उनका कहना था कि पीओके में पारदर्शी तरीके से चुनाव नहीं हो रहा है।

पीटीआई का चुनाव के पूर्ण बहिष्कार का आह्वान

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) की पीओजेके इकाई ने पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में चल रहे विधानसभा चुनावों के पूर्ण बहिष्कार का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है और इसे प्रदर्शनकारियों के खिलाफ हिंसा के माहौल में आयोजित किया गया।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए कई पोस्टों में पीटीआई पीओजेके ने अपने महासचिव मीर अतीक-उर-रहमान का एक वीडियो संदेश साझा किया, जिसमें उन्होंने क्षेत्र की वर्तमान स्थिति, अशांति के दौरान निहत्थे कश्मीरियों की मौतों और चुनावों के बहिष्कार के पार्टी के फैसले पर बात की।

पीओके में हो रहे चुनावों को बताया मज़ाक

रहमान ने पीओजेके में हो रहे चुनावों को "सबसे खराब तरह का मज़ाक" बताते हुए कहा कि "स्वतंत्रता आंदोलन के बेस कैंप कहे जाने वाले इस राज्य में इस तरह का नाटक अब बंद होना चाहिए।"

पीटीआई नेता ने पीओजेके में पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) की सरकार और पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज़ (पीएमएल-एन) की भी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों सरकारें राजनीतिक लाभ के लिए कश्मीरियों को "गद्दार" के रूप में पेश करती हैं। रहमान ने कहा कि चुनावों के बहिष्कार का फैसला पार्टी की केंद्रीय राजनीतिक समिति और नेतृत्व द्वारा लिया गया है और यह "वास्तव में कश्मीरियों की सोच का प्रतिनिधित्व करता है।"

निहत्थे नागरिकों पर बल प्रयोग अस्वीकार्य

चल रहे विरोध प्रदर्शनों का उल्लेख करते हुए पीटीआई पीओजेके ने कहा कि रहमान ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग की निंदा करते हुए कहा कि "निहत्थे और निर्दोष नागरिकों के खिलाफ बल का प्रयोग कभी स्वीकार्य नहीं हो सकता।" उन्होंने आरोप लगाया कि "बुनियादी अधिकारों की आवाज़ को गोलियों के बल पर दबाने की कोशिश की जा रही है।"

पीटीआई पीओजेके के अनुसार, रहमान ने कहा कि जब हिंसा में मारे गए युवाओं के परिवार अंतिम संस्कार कर रहे थे, तब चुनावी प्रक्रिया का जश्न मनाया जा रहा था, जबकि जनता व्यापक रूप से इन चुनावों को खारिज कर चुकी है। उन्होंने इसे "घावों पर नमक छिड़कने के समान" बताया।

हिंसा के बजाय संवाद का रास्ता

पार्टी के अनुसार, रहमान ने अधिकारियों से बल प्रयोग के बजाय संवाद का रास्ता अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा, "शासकों को होश में आना चाहिए। समस्याओं का समाधान दमन, हिंसा और बल प्रयोग से नहीं होता। जनता की आवाज़ सुनी जानी चाहिए।"

पीटीआई पीओजेके ने यह भी दावा किया कि रावलाकोट के धे चौक पर हजारों लोग धरने पर बैठे हुए हैं और आरोप लगाया कि रेंजर्स ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की, जिसमें दर्जनों लोगों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए।

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पीटीआई पीओजेके ने मुज़फ्फराबाद डिवीजन, जम्मू और घाटी के निवासियों से अपील की कि वे मीरपुर डिवीजन की तरह ही उन चुनावों का पूर्ण बहिष्कार करें, जिन्हें पार्टी ने "धांधलीपूर्ण, फर्जी, अपारदर्शी और निष्पक्षता से रहित चुनाव" बताया है।

Written By: Pradeep Singh