नई दिल्ली: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को सिंगापुर के प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंधों के विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति और आगे की रणनीति पर चर्चा हुई।

बैठक में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद भी मौजूद रहे।

जयशंकर ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर बैठक की जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्हें सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग से मुलाकात कर खुशी हुई। उन्होंने बताया कि बैठक में भारत-सिंगापुर संबंधों के विभिन्न आयामों में हुई प्रगति पर चर्चा की गई और साझेदारी को आगे बढ़ाने को लेकर वोंग के विचारों को महत्वपूर्ण बताया।

वहीं, लॉरेंस वोंग ने भी भारतीय मंत्रियों से मुलाकात को सुखद बताया। उन्होंने कहा कि सिंगापुर में होने वाली चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक (ISMR) से पहले भारतीय मंत्रियों से बातचीत करना खुशी की बात है।

व्यापक रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने पर जोर

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल चौथी India-Singapore Ministerial Roundtable (ISMR) और चौथी India-Singapore Business Roundtable (ISBR) में हिस्सा ले रहा है। इन बैठकों का उद्देश्य दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को और मजबूत करना है।

बैठक में Comprehensive Strategic Partnership के रोडमैप को तेजी से लागू करने और आर्थिक सहयोग, डिजिटलाइजेशन, कनेक्टिविटी, कौशल विकास तथा स्थिरता जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग मजबूत करने पर चर्चा हुई।

दोनों पक्षों ने व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रोडमैप को लागू करने में हुई प्रगति की समीक्षा की और इसके क्रियान्वयन में तेजी लाने के नए रास्तों पर विचार किया।

2025 की बैठक के बाद प्रगति की होगी समीक्षा

चौथी भारत-सिंगापुर मंत्रिस्तरीय गोलमेज बैठक 20 अगस्त को आयोजित की जा रही है। इसमें अगस्त 2025 में नई दिल्ली में हुई तीसरी गोलमेज बैठक के बाद हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

साथ ही, दोनों देशों की व्यापक रणनीतिक साझेदारी के रोडमैप को तेजी से लागू करने के लिए नए क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाएं तलाशने पर भी जोर दिया जाएगा।

सिंगापुर भारत में सबसे बड़ा FDI स्रोत

वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में सिंगापुर भारत में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) का सबसे बड़ा स्रोत रहा। इस दौरान सिंगापुर से भारत में 19.8 अरब अमेरिकी डॉलर का FDI आया।

अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच सिंगापुर से भारत में कुल FDI 194.68 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच गया है।

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दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। मंत्रालय के अनुसार, यह व्यापार वित्त वर्ष 2004-05 में 6.7 अरब डॉलर से बढ़कर 2025-26 में 36.1 अरब डॉलर हो गया है।

Written By : Pradeep Singh