धार स्थित भोजशाला परिसर को लेकर इंदौर हाई कोर्ट की खंडपीठ ने हाल ही में महत्वपूर्ण निर्णय दिया है। अदालत ने अपने आदेश में इसे मंदिर स्वरूप वाला स्थान माना है और कहा है कि मुस्लिम पक्ष यदि अलग व्यवस्था चाहता है तो वह सरकार को आवेदन देकर वैकल्पिक भूमि की मांग कर सकता है। इस फैसले के साथ ही कोर्ट ने यह भी सुझाव दिया है कि सरकार को ब्रिटेन से वाग्देवी की प्राचीन प्रतिमा वापस लाने के लिए प्रयास करने चाहिए। यह प्रतिमा 19वीं सदी में खुदाई के दौरान मिली थी और बाद में ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा विदेश ले जाई गई थी।
हिंदू पक्ष के वकील ने कही ये बात
इस मामले में दायर एक अन्य याचिका, जिसमें दोनों समुदायों के बीच आपसी सौहार्द बनाए रखने की व्यवस्था की मांग की गई थी, अदालत ने खारिज कर दी। वहीं हिंदू पक्ष के वकील विष्णु शंकर जैन ने निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे पूजा-अर्चना के अधिकार को मजबूती मिली है।
देवी सरस्वती से जुड़ा प्राचीन मंदिर
भोजशाला का विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। एक पक्ष इसे देवी सरस्वती से जुड़ा प्राचीन मंदिर और शिक्षा केंद्र मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताता है। इसके अलावा कुछ जैन संगठनों का यह भी दावा है कि यह स्थल ऐतिहासिक रूप से जैन मंदिर और गुरुकुल रहा है।
लंबे समय के बाद आया फैसला
हिंदू पक्ष ने अदालत में यह मांग रखी थी कि पूरे वर्ष यहां नियमित रूप से पूजा की अनुमति दी जाए और परिसर को मंदिर के रूप में मान्यता दी जाए। इस मुद्दे पर कई वर्षों से कानूनी बहस चल रही थी, जिसके बाद अब अदालत का यह फैसला सामने आया है। फैसले के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। धार जिले में धारा 163 लागू कर दी गई है और पुलिस बल को संवेदनशील क्षेत्रों में तैनात किया गया है। शहर में गश्त बढ़ा दी गई है ताकि किसी भी तरह की अफवाह या तनाव की स्थिति को रोका जा सके।
Written By Toshi Shah