सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी डॉ. गीतांजलि आंग्मो ने सोमवार, 20 जुलाई को दिल्ली हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच में याचिका दायर कर सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती दी है। इस फैसले में सोनम वांगचुक को सफदरजंग   अस्पताल से किसी अन्य अस्पताल में स्थानांतरित करने की अनुमति नहीं दी गई थी।

गीतांजलि ने अस्पताल को लेकर कही ये बात

गीतांजलि का तर्क है कि सोनम वांगचुक को अपनी पसंद के अस्पताल में इलाज कराने का अधिकार है, उन्होंने अपनी अपील में कहा है कि हाई कोर्ट के पहले आदेश से सोनम वांगचुक और उनके परिवार के उस अधिकार पर असर पड़ा है, जिसके तहत वे इलाज से जुड़े फैसले खुद ले सकते हैं।

“अनुच्छेद 21 के तहत शारीरिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का दिया हवाला”

याचिका में यह भी कहा गया है कि अदालत के आदेश में मरीज की सहमति और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया। गीतांजलि आंग्मो ने ‘इन्फॉर्म्ड कंसेंट’ यानी इलाज से जुड़ी पूरी जानकारी मिलने के बाद मरीज की सहमति और संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत शारीरिक स्वतंत्रता के सिद्धांतों का हवाला दिया है।

सोनम वांगचुक के खिलाफ नहीं थे कोई गिरफ्तारी के आदेश

अपील में दावा किया गया है कि सोनम वांगचुक के खिलाफ न तो गिरफ्तारी का कोई आदेश है और न ही उन्हें हिरासत में रखने का कोई कानूनी आधार मौजूद है। इसके बावजूद उन्हें सरकारी अस्पताल में रहने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

मौलिक अधिकारी हो रहा है प्रभावित

डॉ. आंग्मो ने अपनी याचिका में कहा है कि सफदरजंग अस्पताल में सोनम वांगचुक का लगातार रहना उनके मौलिक अधिकारों को प्रभावित कर रहा है, उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 का उल्लेख करते हुए कहा कि इसमें अभिव्यक्ति और विरोध करने के अधिकार भी शामिल हैं।

जल्द सुनवाई की करेगी मांग

सोनम वांगचुक की कानूनी टीम के अनुसार, वरिष्ठ अधिवक्ता सोमवार को डिवीजन बेंच के समक्ष इस मामले का उल्लेख करेंगे और जल्द सुनवाई की मांग रखेंगे।

 

 

Written By Toshi Shah