Delhi Master Plan 2047: देश की राजधानी दिल्ली की बढ़ती आबादी और बुनियादी ढांचे की चुनौतियों से निपटने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने मास्टर प्लान 2047 के तहत एक बड़े प्रोजेक्ट का खाका तैयार किया है। बता दें कि डीडिए द्वारा 'दूसरे शहरी विस्तार मार्ग' (UER-II) और द्वारका एक्सप्रेसवे के दोनों तरफ 250-250 मीटर के दायरे में 'हाई-डेंसिटी कॉरिडोर' विकसित करने का निर्णय लिया गया है। 20 वर्ग किलोमीटर में फैले इस ड्रीम प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य आने वाले दशकों में दिल्ली पर पड़ने वाले आबादी के दबाव को कम करना है।
80 लाख अतिरिक्त आबादी को मिलेगी राहत
अनुमानों के मुताबिक, अगले दो दशकों में दिल्ली में लगभग 80 लाख अतिरिक्त लोग जुड़ेंगे। सीमित जमीन को देखते हुए यह कॉरिडोर 'वर्टिकल डेवलपमेंट' यानी ऊंची इमारतों और बेहतर जगह प्रबंधन पर केंद्रित होगा। इस कॉरिडोर के बनने से न केवल पुरानी दिल्ली के भीड़भाड़ वाले इलाकों को राहत मिलेगी, बल्कि राष्ट्रीय राजधानी को एक विश्वस्तरीय आधुनिक रूप भी मिलेगा।
कॉरिडोर की मुख्य विशेषताएं
UER-II के दोनों ओर 250-250 मीटर चौड़ी पट्टी में कुल 20 वर्ग किलोमीटर का अधिसूचित क्षेत्र होगा, अव्यवस्थित निर्माण रोकने के लिए न्यूनतम भूखंड का आकार 4,000 वर्ग मीटर तय किया गया है। साथ ही 400 तक फ्लोर एरिया रेशियो (FAR) की अनुमति दी गई है । एक ही प्लॉट पर आवासीय, व्यावसायिक, रिटेल और मनोरंजन परिसरों का एक साथ निर्माण हो सकेगा।
अत्याधुनिक कनेक्टिविटी
यह कॉरिडोर इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे, प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों के साथ-साथ गुरुग्राम और सोनीपत से सीधा जुड़ेगा। पैदल यात्रियों के लिए समर्पित ट्रैक, चौड़ी सड़कें और मेट्रो व बस नेटवर्क का एकीकृत जाल। इस योजना के धरातल पर उतरने के बाद दिल्ली न सिर्फ बुनियादी ढांचे के मामले में और मजबूत होगी, बल्कि एनसीआर के बीच आवागमन का सबसे प्रमुख केंद्र बनकर उभरेगी।
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