पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने पीएम मोदी पर विवादित बयान दिया। वहीं अब इस बयान पर भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक ख्वाजा आसिफ के बयान को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए कहा कि उनके पास कोई काम नहीं है। इसलिए वह अक्सर ऐसे मुद्दों पर बयान देते हैं जिनकी उन्हें पूरी जानकारी नहीं होती। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान के रक्षा मंत्री लगातार ऐसे बयान देकर समय बिताते हैं,जो तथ्यों से परे होते हैं और केवल विवाद पैदा करने के उद्देश्य से दिए जाते हैं।
'ख्वाजा आसिफ की टिप्पणियां उनकी मानसिकता को दर्शाती हैं'
सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि ख्वाजा आसिफ की टिप्पणियां उनकी मानसिकता को दर्शाती हैं और पाकिस्तान में उन्हें रक्षा मंत्री जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिलना वहां की मौजूदा राजनीतिक और प्रशासनिक स्थिति का संकेत है। सूत्रों ने यह भी टिप्पणी की कि जलन कभी भी अच्छी बात नहीं होती, विशेष रूप से ऐसे व्यक्ति के लिए जो लगातार नफरत फैलाने वाले बयान देता हो।
सेशेल्स के सम्मान पर की थी टिप्पणी
भारत सरकार की यह प्रतिक्रिया उस बयान के बाद आई,जिसमें ख्वाजा आसिफ ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स द्वारा दिए गए सर्वोच्च सम्मान का मजाक उड़ाया था। उन्होंने इस सम्मान को कथित तौर पर "बनावटी" बताते हुए उसकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाने की कोशिश की थी। दरअसल,पिछले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सेशेल्स की यात्रा के दौरान पर्यावरण संरक्षण,समुद्री संसाधनों के संरक्षण और छोटे द्वीपीय देशों के सतत विकास में उनके योगदान के लिए देश का नया सर्वोच्च सम्मान 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' प्रदान किया गया। प्रधानमंत्री मोदी इस सम्मान को प्राप्त करने वाले पहले वैश्विक नेता बने हैं।
नई सम्मान प्रणाली के तहत मिला पुरस्कार
यह सम्मान प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा से कुछ सप्ताह पहले ही शुरू किया गया था। सेशेल्स सरकार ने अपनी पुरानी राष्ट्रीय सम्मान प्रणाली में बदलाव करते हुए नई सम्मान व्यवस्था लागू करने का फैसला किया था। इसी प्रक्रिया के तहत इस नए सर्वोच्च सम्मान की शुरुआत की गई। सरकारी जानकारी के अनुसार, 24 जून को सेशेल्स की कैबिनेट ने 'गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन' सम्मान को औपचारिक मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यात्रा के दौरान उन्हें इस सम्मान से नवाजा गया। सेशेल्स सरकार ने इसे दोनों देशों के मजबूत संबंधों और वैश्विक पर्यावरण संरक्षण में भारत की भूमिका की भी सराहना बताया।
भारत में भी छिड़ा राजनीतिक विवाद
प्रधानमंत्री मोदी को मिले इस सम्मान को लेकर भारत में भी राजनीतिक बहस देखने को मिली। विपक्षी दलों ने सम्मान से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज में कथित स्पेलिंग और टाइपिंग की गलतियों का मुद्दा उठाया। इसके अलावा सम्मान से संबंधित तस्वीरों को लेकर भी सवाल खड़े किए गए। विपक्ष ने आरोप लगाया कि तस्वीर जल्दबाजी में तैयार की गई और उसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) आधारित डिजिटल टूल का इस्तेमाल किया गया हो सकता है। इन आरोपों के बाद सोशल मीडिया पर भी इस विषय को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि सरकार समर्थकों ने इन दावों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खारिज किया।
सेशेल्स सरकार ने दी सफाई
बढ़ते विवाद के बीच सेशेल्स सरकार ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दिया गया सम्मान पूरी तरह वास्तविक और वैध है। सरकार ने कहा कि देश ने अपनी पुरानी सम्मान प्रणाली समाप्त कर नई राष्ट्रीय सम्मान व्यवस्था लागू की है,जिसके तहत यह नया सर्वोच्च सम्मान स्थापित किया गया। सेशेल्स प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया कि सम्मान की शुरुआत पूरी तरह संवैधानिक और सरकारी प्रक्रिया के तहत हुई थी तथा कैबिनेट की मंजूरी मिलने के बाद ही इसे लागू किया गया। सरकार ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को सम्मानित करने का निर्णय उनके वैश्विक नेतृत्व,पर्यावरण संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता और छोटे द्वीपीय देशों के विकास में योगदान को ध्यान में रखते हुए लिया गया था।
बयानबाजी से बढ़ा राजनीतिक माहौल
ख्वाजा आसिफ की टिप्पणी और उस पर भारत सरकार की तीखी प्रतिक्रिया ने एक बार फिर दोनों देशों के बीच बयानबाजी को तेज कर दिया है। वहीं,प्रधानमंत्री मोदी को मिले अंतरराष्ट्रीय सम्मान को लेकर देश के भीतर भी राजनीतिक चर्चा जारी है। हालांकि सेशेल्स सरकार की आधिकारिक सफाई के बाद सम्मान की वैधता को लेकर उठे सवालों का जवाब मिल गया है, लेकिन इस मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप अभी भी थमते नजर नहीं आ रहे हैं।
Written By: Geeta Sharma