राजधानी दिल्ली के राजघाट स्थित गांधी स्मृति दर्शन में मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के सम्मेलन में ‘आओ जड़ों से जुड़ें’ अभियान को देशभर में आगे बढ़ाने का संकल्प लिया गया। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि लोगों की धार्मिक मान्यताएं और पूजा-पद्धति अलग हो सकती है, लेकिन उनकी मातृभूमि और भारतीय पहचान एक है। कार्यक्रम की अध्यक्षता मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के मार्गदर्शक इंद्रेश कुमार ने की कि धर्म व्यक्ति की आस्था का विषय है, लेकिन इससे उसकी भारतीय पहचान नहीं बदलती, उन्होंने कहा, “हम हिंदुस्तानी थे और हैं। इस सफर का इम्तेहान हमें रोज और 24 घंटे देना है।” इंद्रेश कुमार ने लोगों से अपने परिवार, पूर्वजों और वंशावली यानी शिजरे को जानने की अपील की, उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘आओ जड़ों से जुड़ें’ धर्मांतरण का अभियान नहीं, बल्कि साझा विरासत को समझने और दिलों को जोड़ने की पहल है, उन्होंने नफरत की जगह संवाद, भाईचारे और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करने पर जोर दिया।

‘एक कौम, एक वतन-हिंदुस्तान’

NCMEI के ऑफिशिएटिंग चेयरमैन डॉ. शाहिद अख्तर ने कहा, “एक कौम, एक वतन-हिंदुस्तान। हमारे पूर्वज सब एक थे। हम भारतीय थे, भारतीय हैं और भारतीय रहेंगे,” उन्होंने कहा कि देश की विविधता उसकी ताकत है और सामाजिक एकता के लिए साझा विरासत को समझना जरूरी है। अभियान के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. ताहिर हुसैन ने कहा कि यह पहल किसी एक समुदाय तक सीमित नहीं है। समाज को धर्म, जाति और भाषा के नाम पर बांटने वाली सोच के खिलाफ संवाद और समझ को बढ़ावा देना अभियान का उद्देश्य है।

जड़ों की पहचान से मजबूत होगा सामाजिक विश्वास

राष्ट्रीय संयोजक डॉ. शालिनी अली ने कहा कि अलग-अलग समुदायों के बीच संवाद बढ़ने से गलतफहमियां कम होंगी और सामाजिक विश्वास मजबूत होगा। वहीं प्रो. माहरुख मिर्जा ने इंसानियत और एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ खड़े होने का संदेश दिया। सम्मेलन में वक्ताओं ने कहा कि अपनी जड़ों को जानना किसी दूसरे समुदाय से दूरी बनाना नहीं है। इसका उद्देश्य अपनी विरासत को समझने के साथ दूसरे की पहचान का सम्मान करना है। राजघाट से सम्मेलन ने संदेश दिया कि नफरत का जवाब नफरत नहीं, बल्कि संवाद, सम्मान और भाईचारा है।

 

Written By: M. Atharuddin Munne Bharti

Edited By : Toshi Shah