Jantar Mantar Protest: जंतर-मंतर पर कई दिनों से जारी छात्रों के प्रदर्शन का फिलहाल समापन हो गया है। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ हुई बैठक के बाद कॉकरोच जनता पार्टी ने अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। दोनों पक्षों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में बातचीत के नतीजों की जानकारी साझा की और कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों पर सहमति बनी है। संगठन ने प्रदर्शनकारियों से अपने-अपने घर लौटने की अपील भी की।

सरकार के साथ तीन दौर की हुई बातचीत 

छात्र प्रतिनिधियों के अनुसार, सरकार के साथ तीन दौर की बातचीत हुई, जिसमें उनकी चार प्रमुख मांगों पर विस्तार से चर्चा की गई। संगठन का कहना है कि सरकार ने अधिकांश मांगों को स्वीकार कर लिया है और कुछ मामलों में लिखित आश्वासन देने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है।

पहली मांग: धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सहमति

संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में कॉकरोच जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने बताया कि उनकी पहली और सबसे प्रमुख मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी। उनका दावा है कि धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद संगठन ने इसे अपनी पहली बड़ी सफलता बताया।

रांका ने कहा कि लंबे समय से छात्र इस मुद्दे को लेकर आंदोलन कर रहे थे और सरकार द्वारा इस मांग को स्वीकार किए जाने के बाद आंदोलन समाप्त करने का निर्णय लिया गया।

दूसरी मांग: सभी एफआईआर वापस लेने का आश्वासन

संगठन के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने बताया कि दूसरी मांग प्रदर्शनकारियों और आंदोलन के आयोजकों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर को वापस लेने की थी। उनका कहना है कि यह मांग केवल दिल्ली तक सीमित नहीं थी, बल्कि सभी भाजपा शासित और सहयोगी राज्यों में दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की गई थी।

सौरव दास का बयान 

दास के मुताबिक, सरकार ने इस पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए सभी मामलों की समीक्षा और एफआईआर वापस लेने का आश्वासन दिया है। उन्होंने कहा कि सरकार जल्द ही दर्ज मामलों की प्रतियां संगठन के साथ साझा करेगी। संगठन को उम्मीद है कि तीन से चार दिनों के भीतर सभी दस्तावेज उपलब्ध करा दिए जाएंगे।

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इसके अलावा, सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया है कि भविष्य में प्रदर्शनकारियों और आयोजकों के खिलाफ इस आंदोलन से जुड़े मामलों में कोई नई कार्रवाई नहीं की जाएगी। इस संबंध में संगठन ने सरकार को एक लिखित ड्राफ्ट भी सौंपा है, जिस पर अंतिम सहमति मंगलवार तक मिलने की उम्मीद जताई गई है।

तीसरी मांग: प्रभावित परिवारों को मुआवजा

छात्र संगठन की तीसरी प्रमुख मांग उन परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की थी, जिन्होंने कथित तौर पर NEET परीक्षा आयोजित न हो पाने के बाद अपने परिजनों को खो दिया।

आशुतोष रांका ने कहा कि सरकार इस मांग पर भी सहमत हो गई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि मुआवजा मौजूदा नियमों और कानूनी प्रावधानों के अनुसार दिया जाएगा। संगठन का कहना है कि सरकार ने प्रभावित परिवारों को सम्मानजनक मुआवजा देने का आश्वासन दिया है।

चौथी मांग: परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार

छात्रों की चौथी मांग परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़ी थी। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि बैठक के दौरान परीक्षा सुधारों पर विस्तार से चर्चा हुई और सरकार इस विषय पर छात्र प्रतिनिधियों के साथ मिलकर आगे काम करेगी।

उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने के लिए सुझावों पर विचार किया जाएगा। साथ ही, चार सप्ताह बाद एक और बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें सुधारों की दिशा में हुई प्रगति की समीक्षा की जाएगी।

आगे क्या होगा?

प्रदर्शन समाप्त होने के बावजूद कई मुद्दों पर आगे की प्रक्रिया बाकी है। सबसे पहले सरकार द्वारा लिखित आश्वासन जारी किया जाएगा, जिसमें एफआईआर वापस लेने और भविष्य में कार्रवाई न करने जैसे बिंदु शामिल होंगे। इसके बाद संबंधित राज्यों और प्रशासनिक एजेंसियों के स्तर पर कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

वहीं, परीक्षा सुधारों को लेकर सरकार और छात्र संगठन के बीच संवाद जारी रहेगा। चार सप्ताह बाद प्रस्तावित अगली बैठक में सुधार संबंधी सुझावों पर विस्तृत चर्चा होने की संभावना है।

छात्र संगठन ने आंदोलन स्थगित कर दिया है

फिलहाल, छात्र संगठन ने आंदोलन स्थगित कर दिया है और प्रदर्शनकारियों से शांतिपूर्वक अपने घर लौटने की अपील की है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार अपने दिए गए आश्वासनों को किस समयसीमा में लागू करती है और परीक्षा सुधारों को लेकर आगे क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

Written By: Geeta Sharma