Maharashtra News: महाराष्ट्र के हिंगोली जिले में सरकारी स्कूल की बदहाल व्यवस्था को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों को घेरा। आपको बता दें कि स्वतंत्रता दिवस से शुरू किए गए ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत दीपके शनिवार को एक सरकारी स्कूल का निरीक्षण करने पहुंचे थे। यहां उन्होंने स्कूल के प्रिंसिपल पर शराब पीकर आने का आरोप लगाया, जिसके बाद ये मुद्दा शिक्षा विभाग के अधिकारी के सामने उठाया। दीपके ने अधिकारी को फोन लगाकर कहा कि अगर दो दिन के भीतर प्रिंसिपल को नहीं हटाया गया, तो वह गांव वालों के साथ मिलकर प्रदर्शन करेंगे।

शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं
बता दें कि अभिजीत दीपके ने दावा किया कि ग्रामीणों की ओर से स्कूल के प्रिंसिपल के खिलाफ पहले भी शिकायतें की गई थीं। आरोप है कि प्रिंसिपल शराब के नशे में स्कूल आते हैं, लेकिन शिकायतों के बावजूद प्रशासन की ओर से कोई कार्रवाई नहीं की गई। दीपके ने स्कूल की दूसरी समस्याओं को भी सामने रखा। उनके मुताबिक, स्कूल में पांच क्लासरूम हैं, लेकिन सिर्फ दो शिक्षक हैं। उन्होंने शिक्षा विभाग से इन समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।

अधिकारी को फोन कर दिया अल्टीमेटम
स्कूल में निरीक्षण के दौरान दीपके ने शिक्षा विभाग के अधिकारी से फोन पर बात की। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए और अगर मंगलवार तक प्रिंसिपल को नहीं हटाया गया तो वह ग्रामीणों के साथ प्रदर्शन में शामिल होंगे। इस पूरी बातचीत का वीडियो भी दीपके ने सोशल मीडिया पर शेयर किया है।

सरकारी स्कूलों में पानी तक नहीं
स्वतंत्रता दिवस पर दीपके अपने पैतृक गांव संतुक पिंपरी पहुंचे थे। ध्वजारोहण कार्यक्रम में शामिल होने के बाद उन्होंने जिला परिषद के सरकारी स्कूल का निरीक्षण किया। उन्होंने दावा किया कि स्कूल के शौचालयों में पानी की व्यवस्था नहीं थी। इसके अलावा स्कूल की खिड़कियां टूटी हुई थीं और विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त बेंच भी नहीं थीं। दीपके ने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी अगर सरकारी स्कूलों में पानी जैसी बुनियादी सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो देश के विकास पर सवाल उठना स्वाभाविक है।

स्कूल बंद करने की नहीं, खोलने की जरूरत
दीपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सरकार पर भी सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि पिछले 10 वर्षों में देश में 94 हजार से ज्यादा सरकारी स्कूल बंद हुए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को स्कूल बंद करने के बजाय नए स्कूल खोलने और मौजूदा स्कूलों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा में समान अवसर के बिना देश के विकसित होने का दावा अधूरा है। उनके मुताबिक, ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को आज भी स्कूल तक पहुंचने के लिए सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ रहा है।

निजी स्कूलों की फीस सीमित करने की मांग
अभिजीत दीपके ने निजी स्कूलों की फीस को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कई परिवार बच्चों की पढ़ाई के लिए एक से डेढ़ लाख रुपये तक फीस देने को मजबूर हैं। ऐसे में निजी स्कूलों की फीस को सीमित किया जाना चाहिए, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी बेहतर शिक्षा का अवसर मिल सके।

अब सरकारी अस्पतालों पर भी अभियान
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बाद CJP सरकारी अस्पतालों की स्थिति को लेकर भी अभियान चलाने की तैयारी कर रही है। दीपके का कहना है कि देश की राजनीतिक दिशा तय करने में ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं की भी सक्रिय भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने अभिभावकों से अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का जायजा लेने, वहां उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं का रिकॉर्ड तैयार करने और समस्याओं के वीडियो साझा करने की अपील की है। दीपके के मुताबिक, इन आंकड़ों को महाराष्ट्र के साथ-साथ देशभर से जुटाकर संकलित किया जाएगा। हालांकि, प्रिंसिपल पर शराब पीकर स्कूल आने और प्रशासन की ओर से शिकायतों पर कार्रवाई न करने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों और स्कूल प्रशासन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

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Written by Shailesh Yadav