CauveryWaterDispute : कावेरी जल बंटवारे से जुड़ी याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में होने वाली सुनवाई अगले हफ्ते तक के लिए टाल दी गई है। कावेरी नदी के पानी बंटवारे को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से विवाद रहा है।

साल 1990 में कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण बना

कावेरी जल बंटवारा विवाद मुख्य रूप से कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच काफी पुराना है। इसमें विवाद में केरल और पुडुचेरी भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले के मुताबिक कुल पानी में तमिलनाडु को 404.25 टीएमसी और कर्नाटक को 284.75 टीएमसी पानी मिलता है। कावेरी जल विवाद कोई नया नहीं बल्की पुराना है, यह विवाद अंग्रेजों के समय में साल 1892 और 1924 के समझौतों से जुड़ा है। साल 1990 में कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण बना है। साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट ने पैसले में बदलाव किया और कर्नाटक को तमिलनाडु के लिए हर साल 177.25 टीएमसी पानी छोड़ने का निर्देश दिया था। लेकिन तमिलनाडु का काम इतने पानी से पूरा नहीं चल पा रहा। जिसके बाद मामला लगातार निचली अदालतों से होता हुआ सुप्रीम कोर्ट की दहलीज पर जा पहुंचा। जिसमें लगातार सुनवाई चल रही है। आज सुप्रीम कोर्ट में फिर से मुद्दा गरमाया। याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अलगे हफ्ते तक सुनवाई को टाल दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने अगले हाफ्ते तक सुनवाई टाली

कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच कावेरी जल बंचवारे को लेकर विवाद लगातार सुर्खियों का हिस्सा बना हुआ है। जस्टिस विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली बेंच मामले में सुनवाई कर रही है। सुनवाई के दौरान तमिलनाडु ने कर्नाटक पर सिंचाई के लिए पानी छोड़ने के बावजूद को राज्य को पानी न मिलने का आरप लगाया। लेकिन कर्नाटक सरकार ने कोर्ट में दलील देते हुए कहा कि उसके बारे में जो तथ्य पेश किए गए हैं। वह सही नहीं है। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक सरकार को कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों को मानने के साथ-सथ तमिलनाडु के लिए पानी छोड़ने की बात कही। कोर्ट ने दलील देते हुए रिपोर्ट मांगी। कोर्ट ने मामले में अगली सुनवाई 24 अगस्त तय की गई थी। इस पर आज सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष की दलीलों को सुना, सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर अगले हाफ्ते तक सुनवाई टाल दी है।

पानी देने का दावा कितना सच कितना झूठ?


इस पूरे विवाद में तमिलनाडु की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सी.एस. वैद्यनाथन ने कोर्ट को बताया कि कर्नाटक जल प्रबंधन प्राधिकरण के निर्देशों के मुताबिक पानी नहीं छोड़ रहा है। जिससे राज्य के किसानों को जरूरी पानी नहीं मिल रहा। कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के फैसले के मुताबिक तमिलनाडु अब 64 टीएमसी पानी की जरूरत है। लेकिन उसे केवल 14 टीएमसी पानी ही मिलेगा। राज्य ने यह भी दावा किया कि इस वर्ष पानी के कम फ्लो को ध्यान में रखते हुए भी अनुपातिक रुप से 55.29 प्रतिशत पानी की जरूरत है। फिलहाल 20 टीएमसी पानी की कमी अभी भी बनी हुई है। आखिर तमिलनाडु क्या सच में कर्नाटक को पानी दे रहा है या यह महज एक झूठ है इसे लेकर भी तमाम सवाल उठ रहे हैं। 

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