मांड्या, कर्नाटक। कावेरी नदी के पानी को लेकर कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद मंगलवार को एक बार फिर तेज हो गया। कर्नाटक के मांड्या जिले में किसानों ने सड़कों पर उतरकर कावेरी जल विनियमन समिति (CWRC) की हालिया सिफारिशों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।

किसानों ने समिति के निर्देशों को बताया डेथ वारंट 

प्रदर्शनकारी किसानों ने समिति के निर्देशों को “डेथ वारंट” करार देते हुए कहा कि इसे तैयार करने वाले लोगों को जमीनी हकीकत की जानकारी नहीं है। किसानों ने कावेरी जल प्रबंधन प्राधिकरण (CWMA) से मांग की कि इन सिफारिशों को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए।

एक प्रदर्शनकारी ने सवाल उठाया, “अगर 15 दिनों में 16 टीएमसी पानी छोड़ा जाएगा, तो राज्य के लोगों का क्या होगा?” किसानों ने चेतावनी दी कि अगर इस मुद्दे पर तत्काल फैसला नहीं लिया गया तो यह उनके लिए मौत के वारंट जैसा होगा।

मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से कड़ा रुख अपनाने की अपील

किसानों ने सड़कों पर वाहनों की आवाजाही रोक दी और विरोध जताने के लिए सड़क पर लेट गए। प्रदर्शनकारियों ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से भी कड़ा रुख अपनाने की अपील की।

किसानों ने कहा, “किसी भी कीमत पर तमिलनाडु के लिए पानी नहीं छोड़ा जाना चाहिए। सरकार राज्य के किसानों के हितों की रक्षा करे।”

इससे पहले शिवकुमार ने कहा था कि कर्नाटक सुप्रीम कोर्ट के आदेशों और कानून का सम्मान करता रहेगा, लेकिन साथ ही राज्य के हितों की भी रक्षा करेगा। उन्होंने कम बारिश के कारण पैदा हुई मुश्किल परिस्थितियों का जिक्र करते हुए कहा था कि राज्य CWMA के आदेश का पालन कर रहा है।

CWRC ने दिया था 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश

28 जुलाई 2026 को हुई CWRC की 139वीं बैठक में कावेरी बेसिन की जल और मौसम संबंधी परिस्थितियों का आकलन करने के बाद कर्नाटक को 29 जुलाई से 12 अगस्त तक बिलिगुंडलु में 3,500 क्यूसेक पानी छोड़ने का निर्देश दिया गया था।

इसके लिए कृष्णा राजा सागर (KRS) और काबिनी जलाशयों से पानी छोड़ने को कहा गया था। इसके बाद 30 जुलाई को हुई CWMA की 54वीं आपात बैठक में इस फैसले को मंजूरी दे दी गई।

तमिलनाडु ने भी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया

इस बीच, तमिलनाडु सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट का रुख करते हुए कर्नाटक को कावेरी जल छोड़ने का निर्देश देने की मांग की।

तमिलनाडु सरकार का आरोप है कि कर्नाटक ने CWMA और CWRC के निर्देशों के बावजूद राज्य के हिस्से का निर्धारित कावेरी पानी जारी नहीं किया।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के निर्देश पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।

तमिलनाडु में भी किसानों का अनोखा प्रदर्शन

कावेरी जल को लेकर तमिलनाडु में भी किसानों का विरोध सामने आया था। अगस्त की शुरुआत में तिरुचिरापल्ली में किसानों ने कावेरी नदी के किनारे रेत में खुद को दफन कर विरोध जताया था।

किसान संघ के नेता अय्या कन्नू के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में किसानों ने कहा कि कुरुवई फसल को बचाने के लिए बार-बार पानी की मांग के बावजूद कर्नाटक ने तमिलनाडु के लिए पर्याप्त कावेरी जल नहीं छोड़ा है।

लंबे समय से चला आ रहा कावेरी जल विवाद

कावेरी जल विवाद कर्नाटक और तमिलनाडु के बीच लंबे समय से चला आ रहा अंतरराज्यीय नदी जल बंटवारे का विवाद है। खासकर कम बारिश वाले वर्षों में दोनों राज्यों के बीच पानी के बंटवारे को लेकर तनाव बढ़ जाता है।

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हाल के दिनों में मेकदातु बैलेंसिंग रिजर्वायर परियोजना को लेकर भी दोनों राज्यों के बीच विवाद तेज हुआ है। कर्नाटक इस परियोजना का प्रस्ताव रखता रहा है, जबकि तमिलनाडु इसका विरोध करता है। तमिलनाडु का तर्क है कि इससे राज्य में आने वाले कावेरी के पानी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।

Written By: Pradeep Singh