Owaisi ON NEET UG 2026 Exam Cancelled: राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित नीट-यूजी-2026 परीक्षा को प्रश्नपत्र लीक के गंभीर आरोपों के बाद रद्द करने का फैसला किया। जिसके बाद पूरे देश में यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। यह परीक्षा 3 मई 2026 को भारत के 551 शहरों और 14 विदेशी शहरों में आयोजित की गई थी। जिसमें लगभग 23 लाख अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। सरकार ने इस मामले की जांच CBI को सौंपने की घोषणा की है। जिससे यह संकेत मिलता है कि मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जा रहा है।

प्रश्नपत्र लीक होने के बाद NTA ने उठाया ये कदम

NTA के अनुसार, परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की पहली सूचना 7 मई को मिली थी। एजेंसी ने दावा किया कि उसने प्रश्नपत्र की सुरक्षा के लिए जीपीएस मॉनिटरिंग और वॉटरमार्क जैसी तकनीकों का उपयोग किया था,लेकिन इसके बावजूद पेपर लीक की घटनाओं को रोका नहीं जा सका। प्राप्त सूचनाओं और कानून प्रवर्तन एजेंसियों की प्रारंभिक जांच के आधार पर NTA ने यह निष्कर्ष निकाला कि मौजूदा परीक्षा प्रक्रिया को जारी रखना उचित नहीं होगा।

दोबारा परीक्षा की जाएगी आयोजित: NTA

इस फैसले के बाद NTA ने परीक्षा रद्द करने के साथ-साथ यह भी घोषणा की है कि सभी उम्मीदवारों को उनकी परीक्षा फीस वापस की जाएगी। इसके अलावा, दोबारा परीक्षा आयोजित किए जाने पर किसी भी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा।

पेपर लीक पर केंद्र सरकार पर औवेसी ने उठाए सवाल

इस पूरे मामले पर राजनीतिक प्रतिक्रिया भी तेज हो गई है। हैदराबाद से सांसद और AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने पीएम मोदी और भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब सरकार ने पेपर लीक रोकने के लिए सख्त कानून और कठोर सजा का वादा किया था, तो फिर यह घटना कैसे हुई। ओवैसी ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक विफलता नहीं,बल्कि लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़ा गंभीर मुद्दा है।

'परीक्षा का रद्द होना छात्रों के लिए एक मानसिक पीड़ा'

उन्होंने यह भी कहा कि जो छात्र पिछले एक-दो वर्षों से कठिन मेहनत कर रहे थे और जिनके परिवारों ने कोचिंग पर भारी खर्च किया, उनके लिए यह फैसला मानसिक और आर्थिक दोनों तरह से बड़ा झटका है। ओवैसी ने तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री शायद इस मुद्दे पर भी मन की बात करेंगे, लेकिन इससे छात्रों का नुकसान कम नहीं होगा।

विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है यह मामला

यह मामला न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है, बल्कि देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर बहस छेड़ता है। अब सभी की निगाहें CBI जांच और आने वाली परीक्षा प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिससे प्रभावित छात्रों को न्याय मिल सके।

Written By: Geeta Sharma