UP Assembly Election 2027: भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन जल्द अपनी नई राष्ट्रीय टीम का ऐलान कर सकते हैं। पार्टी संगठन में नई टीम को लेकर मंथन अंतिम दौर में बताया जा रहा है। माना जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठन में युवा और अनुभवी नेताओं के बीच संतुलन साधने की कोशिश होगी। खास तौर पर उत्तर प्रदेश पर पार्टी की नजर है, जहां 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। सूत्रों के मुताबिक, नितिन नवीन की नई टीम में उत्तर प्रदेश से करीब 10 नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में जगह मिल सकती है। इनमें दो महामंत्री, तीन उपाध्यक्ष समेत कई महत्वपूर्ण पद शामिल होने की चर्चा है। हालांकि, अंतिम सूची में नाम और जिम्मेदारियों में बदलाव संभव है।

नई टीम में संगठन का नया संतुलन
भाजपा की प्रस्तावित राष्ट्रीय टीम में 10 उपाध्यक्ष, 8 महामंत्री, एक संगठन महामंत्री, दो सह संगठन मंत्री, 14 मंत्री, एक कोषाध्यक्ष, दो सह कोषाध्यक्ष, एक मीडिया प्रभारी और दो सह मीडिया प्रभारी बनाए जाने की चर्चा है। बीएल संतोष के संगठन महामंत्री के पद पर बने रहने की संभावना है। वहीं शिवप्रकाश और सौदान सिंह के सह संगठन महामंत्री की भूमिका में दोबारा जिम्मेदारी संभालने की चर्चा है। राज्यों के प्रभारियों में भी बदलाव संभव माना जा रहा है। उत्तर प्रदेश प्रभारी के तौर पर बीडी शर्मा के नाम की चर्चा है।

यूपी से इन चेहरों पर नजर
उत्तर प्रदेश से जिन नेताओं के नाम राष्ट्रीय टीम के लिए चर्चा में हैं, उनमें स्मृति ईरानी, विनोद सोनकर, अमरपाल मौर्य, डॉ. महेंद्र सिंह, अशोक कटारिया, हरीश द्विवेदी, पंकज सिंह, विजय बहादुर पाठक और गोविंद नारायण शुक्ला समेत अन्य नाम शामिल बताए जा रहे हैं।

अमरपाल मौर्य पर क्यों दांव?
रायबरेली से आने वाले अमरपाल मौर्य का अपने समाज में प्रभाव माना जाता है। वह ऊंचाहार विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ चुके हैं। हालांकि, उन्हें तत्कालीन सपा प्रत्याशी मनोज पांडेय से हार का सामना करना पड़ा था। बाद में मनोज पांडेय भाजपा में शामिल हुए और योगी सरकार में मंत्री बने। अमरपाल मौर्य को राज्यसभा भेजे जाने के बाद अब संगठन में जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। माना जा रहा है कि इसके जरिए भाजपा मौर्य समाज को राजनीतिक संदेश देना चाहती है।

महेंद्र सिंह का संगठनात्मक अनुभव
प्रतापगढ़ से आने वाले डॉ. महेंद्र सिंह भाजपा के पुराने और अनुभवी नेताओं में गिने जाते हैं। वह उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य रह चुके हैं और योगी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री भी रहे। पार्टी के राष्ट्रीय परिषद में काम करने का अनुभव भी उनके पास है। संगठनात्मक कौशल को देखते हुए राष्ट्रीय टीम में उन्हें जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।

दलित चेहरे के तौर पर विनोद सोनकर
कौशांबी से पूर्व सांसद विनोद सोनकर भाजपा के प्रमुख दलित चेहरों में शामिल हैं। उन्होंने 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव में कौशांबी सीट से जीत दर्ज की थी। संगठन में पहले भी काम कर चुके सोनकर को राष्ट्रीय टीम में शामिल किए जाने की चर्चा को पार्टी की दलित रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

स्मृति ईरानी की वापसी पर निगाहें
अमेठी की राजनीति से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने वाली स्मृति ईरानी के नाम की भी चर्चा है। 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने राहुल गांधी को अमेठी में हराया था, जबकि 2024 में उन्हें कांग्रेस के किशोरी लाल शर्मा से हार का सामना करना पड़ा। अब संगठन में राष्ट्रीय भूमिका मिलने की स्थिति में भाजपा की ओर से उन्हें एक बार फिर महत्वपूर्ण राजनीतिक जिम्मेदारी दिए जाने का संदेश जा सकता है।

अशोक कटारिया से पश्चिमी यूपी का समीकरण
बिजनौर से आने वाले अशोक कटारिया पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा के महत्वपूर्ण गुर्जर चेहरों में माने जाते हैं। वह विधान परिषद के सदस्य हैं और योगी सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री रह चुके हैं। पश्चिमी यूपी के सामाजिक समीकरणों को देखते हुए उनकी राष्ट्रीय टीम में एंट्री को अहम माना जा रहा है।

पंकज सिंह और विजय बहादुर पाठक भी दौड़ में
नोएडा से भाजपा विधायक पंकज सिंह भी राष्ट्रीय टीम में जगह पाने वाले संभावित चेहरों में बताए जा रहे हैं। वह पूर्व रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के बेटे हैं। उत्तर प्रदेश भाजपा की मौजूदा टीम में जगह नहीं मिलने के बाद राष्ट्रीय संगठन में जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है। वहीं विजय बहादुर पाठक लंबे समय तक उत्तर प्रदेश भाजपा संगठन में उपाध्यक्ष की भूमिका निभा चुके हैं और वर्तमान में विधान परिषद के सदस्य हैं। उनके संगठनात्मक अनुभव को देखते हुए राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी मिलने की संभावना जताई जा रही है।

हरीश द्विवेदी और गोविंद नारायण शुक्ला के नाम भी चर्चा में
बस्ती से पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी का नाम भी राष्ट्रीय टीम के संभावित चेहरों में शामिल बताया जा रहा है। असम चुनाव में उनकी भूमिका और केंद्रीय नेतृत्व से करीबी को देखते हुए उन्हें संगठन में अहम जिम्मेदारी मिलने की चर्चा है। इसके अलावा गोविंद नारायण शुक्ला का नाम भी संभावित सूची में बताया जा रहा है।

2027 से पहले संगठन को धार देने की तैयारी
उत्तर प्रदेश में 2027 का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में राष्ट्रीय संगठन में यूपी के नेताओं को जगह देकर पार्टी एक साथ कई सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश कर सकती है। हालांकि, इन नामों और जिम्मेदारियों पर अंतिम फैसला भाजपा नेतृत्व की घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगा। अगर यूपी के इन चेहरों को राष्ट्रीय टीम में जगह मिलती है तो इसका असर सिर्फ संगठन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे 2027 के चुनावी रण से पहले भाजपा की बड़ी राजनीतिक और सांगठनिक तैयारी के तौर पर भी देखा जाएगा। 

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Written by Shailesh Yadav