राजस्थान हाई कोर्ट ने स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम बापू को नाबालिग से दुष्कर्म मामले में दी गई आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। कोर्ट ने साफ किया कि आसाराम को राहत नहीं मिलेगी और उन्हें जल्द ही आत्मसमर्पण करना होगा। हालांकि, सह-आरोपी शिल्पी और शरतचंद को सजा में राहत प्रदान की गई है। यह फैसला जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने सुनाया।

2013 का है मामला

यह मामला वर्ष 2013 का है, जब आसाराम के गुरुकुल में पढ़ने वाली एक नाबालिग छात्रा अपने माता-पिता के साथ जोधपुर स्थित मणाई आश्रम पहुंची थी। परिवार को विश्वास था कि बच्ची किसी अलौकिक प्रभाव से पीड़ित है और आसाराम उसकी मदद कर सकते हैं। आरोपों के अनुसार, आश्रम में छात्रा को अकेले आसाराम की कुटिया में भेजा गया, जहां उसके साथ यौन शोषण किया गया। पीड़िता ने बाद में अपने माता-पिता को पूरी घटना बताई, जिसके बाद कानूनी कार्रवाई शुरू हुई।

19 अगस्त 2013 को दिल्ली के कमला नगर में दर्ज हुआ था मामला

19 अगस्त 2013 को दिल्ली के कमला नगर थाने में इस मामले की जीरो एफआईआर दर्ज की गई। बाद में केस जोधपुर स्थानांतरित किया गया। जांच के बाद जोधपुर पुलिस ने 31 अगस्त और 1 सितंबर 2013 की दरम्यानी रात इंदौर स्थित आश्रम से आसाराम को गिरफ्तार किया था। अदालत में पेशी के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

हाई कोर्ट ने कहा सजा रहेगी जारी

मामले के दौरान आसाराम ने जमानत के लिए निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक कई याचिकाएं दायर कीं। उनकी ओर से देश के कई वरिष्ठ वकीलों ने पैरवी की, लेकिन उन्हें स्थायी राहत नहीं मिल सकी। अब हाई कोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि उनकी सजा जारी रहेगी और उन्हें दोबारा जेल लौटना होगा।

Written By Toshi Shah