Amit Shah on Women Reservation Bill: लोकसभा में शुक्रवार को महिला आरक्षण कानून और प्रस्तावित परिसीमन से जुड़े अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा हुई। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सरकार की ओर से जवाब देते हुए कहा कि इन तीनों प्रस्तावित बदलावों का उद्देश्य लोकतंत्र को अधिक प्रतिनिधित्व आधारित और संतुलित बनाना है। इस बहस में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी राजनीतिक नोकझोंक देखने को मिली।

महिला आरक्षण विधेयक पर बोले अमित शाह

अमित शाह ने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक पर सदन में व्यापक समर्थन देखने को मिला और 56 महिला सांसदों ने इस चर्चा में भाग लिया। उन्होंने दावा किया कि किसी भी दल ने मूल रूप से महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया हैं। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वर्ष 2029 के लोकसभा चुनाव में महिला आरक्षण का प्रभाव दिखाई दे सकता है।

'परिसीमन से देश का होगा भला'

परिसीमन के मुद्दे पर गृह मंत्री ने कहा कि इसका उद्देश्य एक व्यक्ति, एक वोट, एक मूल्य के सिद्धांत को मजबूत करना है। उन्होंने दावा किया कि देश में कई संसदीय क्षेत्रों में जनसंख्या असंतुलन के कारण मतदाताओं की संख्या में भारी अंतर है। कुछ क्षेत्रों में 20 लाख से अधिक मतदाता हैं, जबकि कुछ में काफी कम। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक समानता के सिद्धांत के खिलाफ बताया।

परिसीमन का विरोध का मतलब SC और ST का विरोध: शाह

शाह ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि परिसीमन का विरोध वास्तव में अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के प्रतिनिधित्व का विरोध है। क्योंकि सीटों का पुनर्वितरण इन वर्गों के लिए भी अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि परिसीमन प्रक्रिया के तहत किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा और विशेष रूप से दक्षिण भारत के राज्यों की सीटें कम नहीं की जाएंगी, जैसा कि कुछ राजनीतिक दलों द्वारा आशंका जताई जा रही है।

'विपक्ष जातीय जनगणना फैला रहा भ्रम'

जातीय जनगणना को लेकर भी गृह मंत्री ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि सरकार ने 2026 की जनगणना के साथ जातिगत गणना कराने का निर्णय लिया है और इसे टालने का कोई प्रश्न नहीं है। उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि वह इस मुद्दे पर भ्रम फैला रहा है।