कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के चर्चा में आने के बाद भारत के पूर्व सुप्रीम कोर्ट न्यायाधीश मार्कंडेय काटजू (Markandey Katju) ने एक नई पार्टी का गठन किया है, उन्होंने अपनी पार्टी का नाम "इश्क करो पार्टी" (आईकेपी) रखा है। जस्टिस काटजू का कहना है कि यह पार्टी देश की सामाजिक और आर्थिक चुनौतियों से निपटने के लिए एक गंभीर मंच के रूप में काम करेगी, उन्होंने महुआ मोइत्रा (Mahua Moitra) को भी अपनी पार्टी से जुड़ने का निमंत्रण दिया है।
मार्कंडेय काटजू ने कॉकरोच जनता पार्टी की आलोचना
सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक संदेश में काटजू ने कॉकरोच जनता पार्टी और उसके संस्थापक की तीखी आलोचना की, उन्होंने पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके के विचारों पर सवाल उठाते हुए उन्हें अव्यावहारिक बताया। उल्लेखनीय है कि अभिजीत दिपके राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) के संचालन में कथित अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।
केवल रोमांस या वैलेंटाइन डे जैसी नहीं- काटजू
एक अन्य पोस्ट में काटजू ने स्पष्ट किया कि उनकी नई पार्टी को केवल रोमांस या वैलेंटाइन डे जैसी अवधारणाओं से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार, भारत में गरीबी, बेरोजगारी, कुपोषण और अन्य गंभीर समस्याओं का समाधान समाज में व्यापक एकता और आपसी सहयोग से ही संभव है।
“जाति, धर्म, या किसी अन्य पहचान के आधार पर विभाजित न हो”
काटजू ने कहा कि लोगों को जाति, धर्म, नस्ल या किसी अन्य पहचान के आधार पर विभाजित होने के बजाय एक-दूसरे के प्रति प्रेम और सम्मान की भावना रखनी चाहिए। काटजू का मानना है कि ऐसी एकता के बल पर आधुनिक और प्रगतिशील नेतृत्व के तहत एक प्रभावी जनआंदोलन खड़ा किया जा सकता है, जो देश के वंचित और संघर्षरत वर्गों की स्थिति में सुधार ला सके।
काटजू ने राजनीतिक नेता पर लगाया आरोप
काटजू ने यह भी आरोप लगाया कि अनेक राजनीतिक नेता सत्ता प्राप्ति को प्राथमिकता देते हैं और आम जनता की वास्तविक समस्याओं पर पर्याप्त ध्यान नहीं देते। उनके अनुसार, इश्क करो पार्टी का उद्देश्य इसी प्रवृत्ति का विरोध करना और सामाजिक एकजुटता को मजबूत करना है।
6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर किया था प्रदर्शन
इससे पहले 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा दिल्ली के जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन के बाद काटजू ने उसकी विचारधारा की आलोचना की थी। उन्होंने कहा था कि केवल शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग करने से व्यवस्था में कोई मूलभूत बदलाव नहीं आएगा। उनके अनुसार, यदि एक मंत्री पद छोड़ भी दे, तो उसकी जगह कोई दूसरा व्यक्ति आ जाएगा और इससे समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं होगा।
Written By Toshi Shah