India Pakistan Trade Relations: त्यौहारों के दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहे है। वैसे-वैसे चीनी के दाम बढ़ते जा रहे है। जो चीनी कल तक 42 रुपए किलो मिल रही थी। वही आज 65 रुपए किलो बिक रही है। ऐसे में आम लोगो की जेब पर इसका काफी असर देखने को मिल सकता हैं। जिसे देखते हुए पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान ने भारत की तरफ मदद का हाथ बढ़ाया हैं। पाकिस्तान ने भारत को 12 टन सरप्लस चीनी देने की बात कही है।

हालांकि यह बात पाकिस्तान के चीनी मिली मालिकों की तरफ से कही गई हैं। उनका कहना हैं कि इससे अतिरिक्त स्टॉक घटेगा, नकदी संकट कम होगा और किसानों को भुगतान करना भी आसान होगा साथ ही पाकिस्तान में नया क्रशिंग सीजन भी करीब है, जिससे स्टॉक बढ़ने का खतरा है।

भारतीय बाजार को सप्लाई की उम्मीद
पाकिस्तानी चीनी मिल एसोसिएशन से जुड़े चौधरी मुहम्मद वहीद ने कहा कि पड़ोसी देश होने के चलते पाकिस्तान भारतीय बाजार को सप्लाई करने की अच्छी स्थिति में हो सकता है, जिससे दूर के सप्लायर्स की तुलना में ढुलाई का खर्च कम हो सकता है। उन्होने बताया कि 15 अगस्त तक पाकिस्तान का चीनी स्टॉक 28.1 लाख टन था, जबकि घरेलू खपत औसतन 5.50 लाख टन प्रति माह है। वहीद के मुताबिक, पाकिस्तान के पास कम से कम दिसम्बर 2026 के आखिर तक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए स्टॉक है।

पाकिस्तान पर आर्थिक संकट
पाकिस्तान ने भारत को चीनी बेचने की योजना ऐसे समय में बनाई है, जब वह बड़े आर्थिक संकट से गुजर रहा है। पाकिस्तान पिछले कई सालों से IMF के पैकेज और खाड़ी देशों से मिलने वाले कर्ज से अपनी अर्थव्यवस्था चला रहा है। हाल के महीनों में खाड़ी के प्रमुख देश UAE ने पाकिस्तान से मुंह मोड़ लिया है, जिससे यह दबाव और बढ़ गया है। ऐसे में पाकिस्तान को उम्मीद है कि वह भारत से व्यापार शुरू करके आर्थिक संकट से उबर सकता है।

आर्थिक समन्वय समिति ने ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान कसे की बात
पाकिस्तान की आर्थिक समन्वय समिति (ECC) ने बुधवार को ट्रेडिंग कॉरपोरेशन ऑफ पाकिस्तान (TCP) को 1.08 लाख मीट्रिक टन चीनी के लिए अंतरराष्ट्रीय टेंडर बुलाने की अनुमति दी। यह चीनी पिछले साल आयात की गई 3 लाख मीट्रिक टन खेप का बचा हुआ हिस्सा है। हालांकि अभी यह तय नहीं हुआ है, कि भारत पाकिस्तान से चीनी खरीदेगा, क्योंकि लंबे समय से दोनों देशों में व्यापार ठप है।

भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ता तनाव
बता दें कि पाकिस्तान में चीनी उद्योग के प्रतिनिधियों ने यह मांग ऐसे समय में की है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच पहले से ही कई मुद्दों पर तनाव बढ़ा हुआ है। जिसमें पिछले साल 2025 में ही भारत और पाकिस्तान के बीच तीखी सैन्य झड़प हुई थी। वहीं, भारत ने अभी तक सिंधु जल संधि को भी रोक रखा है।

हालांकि रिपोर्ट के मुताबिक, घरेलू बाजार में इस चीनी को बेचने की दो कोशिशें पहले ही कम कीमत की वजह से सफल नहीं हुई थीं और यहीं से पाकिस्तान की चीनी नीति पर भी कई सवाल उठते हैं। जब घरेलू बाजार में कीमतें कम हैं और सरकार के पास आयातित चीनी का स्टॉक बचा हुआ है, तब मिल मालिक अतिरिक्त चीनी के निर्यात की अनुमति क्यों मांग रहे हैं?